Dhurandhar OTT Release: ‘अनकट’ के नाम पर कटा कंटेंट! रणवीर सिंह की फिल्म से 10 मिनट के सीन हटे तो भड़के फैंस, OTT पर मचा बवाल

OTT प्लेटफॉर्म पर किसी बड़ी फिल्म की रिलीज अब सिर्फ मनोरंजन का मौका नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर बहस और विवाद का कारण भी बन जाती है। हाल ही में रणवीर सिंह स्टारर फिल्म Dhurandhar की OTT रिलीज ने भी ऐसा ही माहौल बना दिया है। जहां एक तरफ मेकर्स ने इसे डिजिटल दर्शकों के लिए खास अनुभव बताया, वहीं रिलीज के तुरंत बाद दर्शकों का गुस्सा फूट पड़ा। आरोप है कि फिल्म का जो वर्जन OTT पर स्ट्रीम हुआ है, वह अनकट नहीं बल्कि एडिटेड वर्जन है, जिसमें करीब 10 मिनट के सीन और कई डायलॉग हटाए गए हैंtaazanews24x7.com

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #DhurandharCutVersion, #UncutWhere और #OTTEdit ट्रेंड करने लगे। दर्शकों ने सवाल उठाया—अगर OTT पर भी वही सेंसरशिप और कट्स मिलेंगे, तो थिएटर और डिजिटल रिलीज में फर्क क्या रह गया?

आइए जानते हैं पूरा मामला, विवाद की वजह, मेकर्स का पक्ष, दर्शकों की प्रतिक्रिया और OTT कंटेंट की बदलती हकीकत पर विस्तृत रिपोर्ट।

क्या है ‘धुरंधर’ और क्यों थी इतनी चर्चा?

‘धुरंधर’ को साल की बड़ी एक्शन-ड्रामा फिल्मों में गिना जा रहा था। रणवीर सिंह का किरदार एक ग्रे-शेड, इंटेंस और आक्रामक पर्सनैलिटी वाला बताया गया था। फिल्म में दमदार एक्शन, रॉ डायलॉग्स और रियलिस्टिक ट्रीटमेंट का वादा किया गया था।

थिएटर रिलीज के दौरान भी फिल्म चर्चा में रही—

  • रणवीर सिंह की ट्रांसफॉर्मेशन
  • हिंसक एक्शन सीक्वेंस
  • बोल्ड भाषा और गालियों का इस्तेमाल
  • डार्क टोन वाली कहानी

OTT रिलीज को लेकर यही कहा गया था कि डिजिटल वर्जन ज्यादा “रॉ” और “अनकट” होगा। यहीं से उम्मीदें बढ़ गईं—और शायद यही उम्मीदें बाद में विवाद की वजह भी बनीं।

OTT रिलीज के बाद क्या हुआ?

जैसे ही ‘धुरंधर’ OTT पर स्ट्रीम हुई, कई दर्शकों ने तुरंत नोटिस किया कि फिल्म के कुछ चर्चित सीन गायब हैं या छोटे कर दिए गए हैं। खासकर वे दृश्य जिनकी चर्चा थिएटर दर्शकों ने पहले की थी।

दर्शकों के मुताबिक हटाए गए हिस्सों में शामिल हैं:

  • एक लंबा इंटरोगेशन सीन
  • दो हाई-वोल्टेज एक्शन ब्लॉक
  • कुछ गाली-गलौज वाले डायलॉग
  • एक इमोशनल क्लाइमैक्स का एक्सटेंडेड वर्जन

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने थिएटर वर्जन और OTT वर्जन के टाइम ड्यूरेशन की तुलना करते हुए पोस्ट डाले और दावा किया कि करीब 8 से 10 मिनट का कंटेंट गायब है

क्या हम 5 साल के बच्चे हैं?” — दर्शकों का गुस्सा

दर्शकों की नाराजगी सिर्फ कटे हुए सीन को लेकर नहीं है, बल्कि “अनकट” के वादे को लेकर है। कई यूजर्स ने लिखा:

  • “अगर OTT पर भी गालियां म्यूट करनी हैं तो फिर फायदा क्या?”
  • “अनकट बोलकर एडिटेड वर्जन दिखाना धोखा है।”
  • “हम एडल्ट हैं, पैरेंटल कंट्रोल का ऑप्शन है—फिर कट क्यों?”
  • “थिएटर में जो देखा, वही घर पर क्यों नहीं देखने दे रहे?”

कुछ फिल्म प्रेमियों ने इसे डिजिटल सेंसरशिप का नया दौर बताया।

क्या OTT पर भी सेंसरशिप लागू है?

यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या OTT प्लेटफॉर्म भी अब फिल्मों को काट-छांट कर दिखा रहे हैं? तकनीकी रूप से OTT पर फिल्मों के लिए थिएटर जैसा सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट जरूरी नहीं होता, लेकिन:

  • प्लेटफॉर्म की अपनी कंटेंट पॉलिसी होती है
  • क्षेत्रीय नियमों और शिकायतों का दबाव होता है
  • फैमिली ऑडियंस को ध्यान में रखकर एडिट किए जाते हैं
  • लीगल रिस्क कम करने के लिए बदलाव किए जाते हैं

कई बार निर्माता खुद भी डिजिटल वर्जन को अलग तरह से एडिट करते हैं ताकि फिल्म ज्यादा व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंच सके।

मेकर्स का संभावित तर्क: अलग प्लेटफॉर्म, अलग कट

फिल्म इंडस्ट्री में यह नई बात नहीं है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए अलग वर्जन तैयार किए जाएं। टीवी प्रीमियर, एयरलाइन वर्जन, इंटरनेशनल वर्जन—सबमें अंतर होता है।

‘धुरंधर’ के मामले में मेकर्स के करीबी सूत्रों की तरफ से जो बातें सामने आईं (रिपोर्ट्स के अनुसार), उनमें शामिल हैं:

  • OTT प्लेटफॉर्म की कंटेंट गाइडलाइन
  • भाषा को थोड़ा सॉफ्ट करना
  • हिंसा के स्तर को कम करना
  • ग्लोबल ऑडियंस के लिए एडिट

हालांकि दर्शकों का कहना है कि अगर बदलाव किए गए हैं तो स्पष्ट डिस्क्लेमर दिया जाना चाहिए था।

रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस पर क्या असर?

‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह का किरदार काफी लेयर्ड और आक्रामक बताया गया है। ऐसे में अगर उनके कुछ इंटेंस सीन हटाए गए हैं, तो परफॉर्मेंस की इम्पैक्ट पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

फिल्म समीक्षकों का मानना है:

  • कुछ कट्स से किरदार की क्रूरता कम लगती है
  • भावनात्मक ट्रांजिशन कमजोर पड़ते हैं
  • कहानी का टेंशन ग्राफ थोड़ा गिरता है

यानी एडिटिंग सिर्फ लंबाई नहीं घटाती—किरदार की गहराई भी प्रभावित करती है।

OTT दर्शक क्या चाहते हैं?

डिजिटल दर्शक पारंपरिक टीवी दर्शक से अलग है। वह:

  • ज्यादा रॉ कंटेंट चाहता है
  • क्रिएटिव फ्रीडम को सपोर्ट करता है
  • अनकट वर्जन की उम्मीद करता है
  • कंट्रोल अपने हाथ में रखना चाहता है

OTT की सफलता की बड़ी वजह यही स्वतंत्रता रही है। अगर वही कंटेंट फिल्टर होकर आए, तो दर्शक निराश होना तय है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद

‘धुरंधर’ पहला मामला नहीं है जब OTT वर्जन को लेकर विवाद हुआ हो। पहले भी कई फिल्मों और सीरीज पर आरोप लगे कि:

  • डायलॉग बदले गए
  • सीन हटाए गए
  • ऑडियो म्यूट किया गया
  • विजुअल ब्लर किए गए

कुछ मामलों में बाद में “डायरेक्टर कट” या “अनकट वर्जन” भी जारी किया गया।

मार्केटिंग बनाम वास्तविकता का टकराव

आज फिल्मों की मार्केटिंग बहुत आक्रामक हो गई है। “अनकट”, “अनसेंसर्ड”, “एक्सटेंडेड”—ये शब्द दर्शकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन अगर असली प्रोडक्ट अलग निकले, तो प्रतिक्रिया भी उतनी ही तेज होती है।

‘धुरंधर’ विवाद ने यह सवाल फिर खड़ा किया है कि:
क्या प्रमोशनल दावों पर निगरानी होनी चाहिए?

प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी बनती है

OTT प्लेटफॉर्म सिर्फ कंटेंट होस्ट नहीं करते, वे ब्रांड भी हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी बनती है कि:

  • वर्जन की स्पष्ट जानकारी दें
  • कट/एडिट की जानकारी डिस्क्लेमर में हो
  • दर्शक को विकल्प दें (अगर संभव हो)
  • पारदर्शिता बनाए रखें

दर्शक अब जागरूक है और तुलना तुरंत कर लेता है।

क्या आएगा ‘अनकट वर्जन’?

फैंस की नाराजगी देखते हुए अक्सर मेकर्स बाद में अनकट वर्जन रिलीज करते हैं—या कम से कम आश्वासन देते हैं। ‘धुरंधर’ के मामले में भी सोशल मीडिया पर मांग उठ रही है कि:

“Release the original cut”

अगर मांग तेज रही, तो संभव है कि भविष्य में एक्सटेंडेड वर्जन देखने को मिले।

फिल्म की कहानी और क्राफ्ट पर एक नजर

विवाद से अलग हटकर अगर फिल्म की बात करें, तो ‘धुरंधर’ एक हार्ड-हिटिंग एक्शन-ड्रामा के रूप में बनाई गई है। इसमें:

  • ग्रे शेड वाला हीरो
  • सिस्टम से टकराव
  • हिंसक टकराव
  • नैतिक दुविधाएं
  • इमोशनल बैकस्टोरी

जैसे तत्व शामिल हैं। टेक्निकल स्तर पर फिल्म मजबूत बताई जा रही है—खासकर एक्शन कोरियोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर।

क्या विवाद से व्यूअरशिप बढ़ेगी?

OTT के दौर में विवाद कई बार नुकसान नहीं, बल्कि प्रमोशन बन जाता है।

  • लोग जिज्ञासा में देखते हैं
  • तुलना करते हैं
  • चर्चा बढ़ती है
  • सोशल मीडिया पर ट्रेंड बनता है

संभव है कि ‘धुरंधर’ के साथ भी यही हो—नाराजगी के बावजूद व्यूज बढ़ें।

निष्कर्ष: कंटेंट की आजादी या कंट्रोल?

‘धुरंधर’ की OTT रिलीज ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म भी अब पारंपरिक सेंसरशिप के रास्ते पर हैं? अगर हां, तो दर्शकों को यह पहले से बताया जाना चाहिए।

रणवीर सिंह की फिल्म ने एक बार फिर साबित किया है कि आज दर्शक सिर्फ कंटेंट नहीं देखता—वह कंटेंट के साथ व्यवहार भी देखता है। पारदर्शिता, ईमानदारी और स्पष्टता—ये अब उतने ही जरूरी हैं जितनी अच्छी कहानी।

फिलहाल ‘धुरंधर’ चर्चा के केंद्र में है—फिल्म से ज्यादा उसके कटे हुए सीनों की वजह से।

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