ओटीटी प्लेटफॉर्म पर क्राइम-थ्रिलर की बाढ़ आई हुई है। हर हफ्ते कोई न कोई नई सीरीज अपराध, मनोविज्ञान, सीरियल किलर और सिस्टम की सड़ांध की कहानी लेकर सामने आ जाती है। ऐसे में दर्शक अब सिर्फ सस्पेंस से संतुष्ट नहीं होता—उसे चाहिए गहराई, ठोस लेखन और याद रह जाने वाले किरदार। इसी भीड़ के बीच आई है BHUMI PEDNEKAR स्टारर नई क्राइम-थ्रिलर सीरीज ‘Daldal’, जो अपने नाम की तरह ही कहानी, किरदार और प्रस्तुति—तीनों स्तर पर एक उलझे हुए, चिपचिपे और असहज अनुभव का वादा करती है। taazanews24x7.com
निर्देशक अमृतराज गुप्ता ने इस सीरीज को एक डार्क साइकोलॉजिकल टोन देने की कोशिश की है। कहानी अपराध की जांच से आगे बढ़कर इंसानी मन के अंधेरे कोनों में उतरने की कोशिश करती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ‘दलदल’ उस स्तर की पकड़ बना पाती है जिसकी उम्मीद इसके ट्रेलर और प्रमोशन से बंधती है? आइए विस्तार से समझते हैं।

कहानी: अपराध से ज्यादा मनोवैज्ञानिक उलझन की दास्तान
‘DALDAL’ की कहानी एक बड़े शहर की पृष्ठभूमि में बुनी गई है, जहां एक के बाद एक खौफनाक हत्याएं हो रही हैं। हत्या के तरीके बेहद क्रूर और असामान्य हैं, जिससे पुलिस को अंदाजा हो जाता है कि मामला किसी सामान्य अपराधी का नहीं, बल्कि एक साइकोलॉजिकल पैटर्न वाले सीरियल किलर का है।
इस केस की जांच की जिम्मेदारी मिलती है सीनियर पुलिस ऑफिसर रीता फरेरा (BHUMI PEDNEKAR) को। रीता बाहर से बेहद सख्त, तेज-तर्रार और बेखौफ अफसर दिखती हैं, लेकिन अंदर ही अंदर वह अपने अतीत के एक गहरे ट्रॉमा से जूझ रही हैं। उनकी निजी जिंदगी, टूटे रिश्ते, दबा हुआ दर्द और अधूरे सवाल—इन सबका असर उनके फैसलों और जांच के तरीके पर साफ नजर आता है।
जैसे-जैसे केस आगे बढ़ता है, कहानी सिर्फ “कातिल कौन?” से आगे निकलकर “क्यों?” पर आ टिकती है। यही जगह है जहां ‘DALDAL’ बाकी सामान्य क्राइम शो से अलग होने की कोशिश करती है—लेकिन यही कोशिश कई जगहों पर कंफ्यूजन भी पैदा कर देती है।
BHUMI PEDNEKAR: सीरीज की सबसे बड़ी ताकत
अगर ‘DALDAL’ को देखने की सबसे बड़ी वजह कोई है, तो वह हैं BHUMI PEDNEKAR। पिछले कुछ सालों में भूमि ने खुद को एक ऐसी एक्ट्रेस के रूप में स्थापित किया है जो चुनौतीपूर्ण और महिला-केंद्रित किरदार चुनने से नहीं डरतीं। ‘भक्षक’ के बाद यह उनका एक और इंटेंस रोल है।
रीता फरेरा के किरदार में भूमि ने कई परतें दिखाई हैं—
- सख्त पुलिस ऑफिसर
- मानसिक रूप से आहत महिला
- सिस्टम से लड़ती जांच अधिकारी
- निजी दर्द छिपाती इंसान
उनके चेहरे के हावभाव, आंखों का तनाव, पूछताछ के दृश्यों में उनकी पकड़ और इमोशनल ब्रेकडाउन—सब कुछ काफी प्रभावशाली है। कई सीन ऐसे हैं जहां कैमरा सिर्फ उनके चेहरे पर टिका रहता है और वही दृश्य को आगे बढ़ाता है।
हालांकि, स्क्रिप्ट कई जगह उनके किरदार को पूरी तरह खुलने का मौका नहीं देती। फिर भी भूमि अपनी परफॉर्मेंस से कई कमजोर दृश्यों को भी संभाल लेती हैं।

निर्देशन: इरादा मजबूत, पकड़ ढीली
निर्देशक अमृतराज गुप्ता का विज़न साफ दिखता है—वे एक ऐसी क्राइम थ्रिलर बनाना चाहते हैं जो सिर्फ केस सुलझाने की कहानी न होकर मानसिक अंधेरे, सामाजिक सड़ांध और नैतिक पतन को भी दिखाए। विजुअल टोन डार्क रखा गया है, लो-लाइट फ्रेम, संकरी गलियां, गीली सड़कें और उदास बैकग्राउंड—ये सब मिलकर एक भारी माहौल बनाते हैं।
समस्या यहां से शुरू होती है कि यह माहौल कहानी की गति पर भारी पड़ने लगता है। कई एपिसोड्स में कहानी आगे कम बढ़ती है, वातावरण बनाने की कोशिश ज्यादा होती है। इससे दर्शक को लगता है कि सीरीज खिंच रही है।
कुछ सीक्वेंस शानदार हैं—खासकर शुरुआती मर्डर सीन और कुछ पूछताछ वाले दृश्य। लेकिन बीच के एपिसोड्स में निर्देशन भटकता नजर आता है।
लेखन और स्क्रीनप्ले: सबसे कमजोर कड़ी
किसी भी क्राइम थ्रिलर की जान उसका लेखन होता है। ‘DALDAL’ यहीं पर सबसे ज्यादा फिसलती है।
- कई सब-प्लॉट शुरू होते हैं लेकिन ठोस अंजाम तक नहीं पहुंचते
- कुछ किरदार आते हैं, प्रभाव छोड़ते हैं, फिर गायब हो जाते हैं
- क्लू और ट्विस्ट कभी-कभी जबरन जोड़े हुए लगते हैं
- साइकोलॉजिकल एंगल को गहराई देने की कोशिश होती है, पर स्पष्टता की कमी रहती है
स्क्रीनप्ले में कंफ्यूजन का DALDAL कई बार इतना गहरा हो जाता है कि दर्शक का भावनात्मक जुड़ाव टूटने लगता है। टीवी के कई स्थापित क्राइम शोज—जैसे CID या Crime Patrol के कुछ एपिसोड—भी केस नैरेशन में ज्यादा स्पष्टता रखते हैं।
क्या सच में डराती है ‘DALDAL’?
सीरीज खुद को डार्क और डिस्टर्बिंग बताती है। कुछ मर्डर सीन वाकई असहज करते हैं। कैमरा क्रूरता को छुपाता नहीं, बल्कि सामने रखता है। लेकिन डर का असर लगातार नहीं बना रहता।
- शुरुआती एपिसोड: झटका देते हैं
- मिड सेक्शन: रफ्तार गिरती है
- क्लाइमैक्स: प्रभावशाली हो सकता था, पर जल्दबाजी महसूस होती है
डर और सस्पेंस के बीच बैलेंस हर एपिसोड में एक जैसा नहीं है।
सहायक कलाकार: अच्छा सपोर्ट, कम स्पेस
सीरीज के सपोर्टिंग कास्ट ने अच्छा काम किया है। जांच टीम के सदस्य, संदिग्ध किरदार और पीड़ितों से जुड़े लोग—सब अपने रोल में विश्वसनीय लगते हैं। लेकिन समस्या यह है कि कई किरदारों को पर्याप्त स्क्रीन टाइम या बैकस्टोरी नहीं मिलती।
अगर इन किरदारों पर थोड़ा और काम किया जाता, तो कहानी ज्यादा परतदार और प्रभावी बन सकती थी।
तकनीकी पक्ष: विजुअल मजबूत, एडिटिंग ढीली
सिनेमैटोग्राफी ‘DALDAL’ का मजबूत पहलू है। फ्रेमिंग, रंगों का चयन और कैमरा मूवमेंट कहानी के डार्क टोन को सपोर्ट करते हैं। बारिश, रात और लोकेशन का इस्तेमाल प्रभावी है।
बैकग्राउंड म्यूजिक तनाव पैदा करता है, लेकिन कुछ जगह जरूरत से ज्यादा तेज और ओवरड्रामैटिक हो जाता है।
एडिटिंग सबसे बड़ी समस्या है—एपिसोड छोटे और टाइट हो सकते थे। कई दृश्य काटे जा सकते थे बिना कहानी को नुकसान पहुंचाए।

महिला-केंद्रित क्राइम थ्रिलर के रूप में ‘DALDAL’
हाल के समय में ओटीटी पर महिला पुलिस अधिकारियों और जांचकर्ताओं की कहानियां बढ़ी हैं। ‘DALDAL’ इस ट्रेंड का हिस्सा है, लेकिन यह सिर्फ जेंडर-स्विच नहीं करती, बल्कि महिला किरदार के मानसिक बोझ और सामाजिक दबाव को भी दिखाने की कोशिश करती है।
रीता फरेरा का किरदार सिर्फ “सख्त अफसर” नहीं, बल्कि टूटन और संघर्ष से गुजरती महिला है। यह पहलू सीरीज को भावनात्मक वजन देता है—भले ही लेखन हर जगह साथ न दे।
क्या ‘DALDAL’ बिंज वॉच लायक है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के दर्शक हैं।
आपको पसंद आएगी अगर:
- आपको डार्क साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर पसंद है
- आप BHUMI PEDNEKAR की परफॉर्मेंस देखना चाहते हैं
- धीमी रफ्तार वाली, माहौल आधारित सीरीज पसंद है
आपको निराश कर सकती है अगर:
- आप तेज रफ्तार, क्लियर और ट्विस्ट-भरी कहानी चाहते हैं
- आप टाइट स्क्रीनप्ले की उम्मीद कर रहे हैं
- आप हर एपिसोड में बड़ा खुलासा चाहते हैं
टीवी क्राइम शोज से तुलना क्यों हो रही है?
कई दर्शकों और समीक्षकों ने कहा है कि कहानी की स्पष्टता और केस-टू-केस पकड़ के मामले में कुछ टीवी क्राइम शोज इससे बेहतर लगते हैं। वजह साफ है—टीवी शोज आम तौर पर केस नैरेशन को सीधा और केंद्रित रखते हैं, जबकि ‘DALDAL’ कई परतें जोड़ते-जोड़ते खुद उलझ जाती है।
ओटीटी का फायदा गहराई है—लेकिन वही गहराई जब स्पष्टता खो देती है, तो तुलना होना स्वाभाविक है।
अंतिम फैसला: कोशिश सराहनीय, नतीजा मिश्रित
‘DALDAL’ एक महत्वाकांक्षी क्राइम थ्रिलर है। इसका विषय मजबूत है, टोन गंभीर है और BHUMI PEDNEKAR की परफॉर्मेंस दमदार है। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, खिंची हुई गति और कई स्तरों पर कंफ्यूजन इसे उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचने देते, जहां यह पहुंच सकती थी।
यह सीरीज पूरी तरह निराश नहीं करती—लेकिन पूरी तरह संतुष्ट भी नहीं करती। इसे एक अधूरी लेकिन दिलचस्प कोशिश कहा जा सकता है।
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— Review Junkie (@reviewjunkie12) January 16, 2026
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