नई दिल्ली — कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने गुरूवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से महत्वपूर्ण बैठक की, और उसके बाद कहा कि “सब कुछ ठीक है और हम सब एक ही पेज पर हैं।” इस बयान ने पार्टी के अंदर चल रही अंतरण अटकलों के बीच एक स्पष्ट संदेश दिया है कि कांग्रेस में जोड़ और नेतृत्व की एकता बनी हुई है। taazanews24x7.com
इस मुलाकात की खबर उन समय सुर्खियों में आई है जब पिछले कुछ दिनों से मीडिया और राजनीतिक गलियों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि Tharoor और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं।

बैठक का वास्तिविक मकसद: मतभेद या मेलजोल?
Shashi Tharoor ने पहले सार्वजनिक तौर पर संकेत दिया था कि उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच कुछ “issues” या मतभेद हैं, जिन्हें वह नेतृत्व के सामने उठाना चाहते हैं। ऐसे वक्त में उनकी यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
बैठक करीब 90 मिनट (लगभग डेढ़ से दो घंटे) तक चली, जिसमें Shashi Tharoor, Rahul Gandhi और Kharge के बीच विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद थरूर ने कहा कि बातचीत “बहुत ही सकारात्मकऔर रचनात्मक” रही और कांग्रेस नेतृत्व के साथ सब कुछ ठीक है।
Tharoor का बयान — “हम सब एक ही पेज पर हैं”
बैठक के बाद थरूर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया (X) हैंडल पर फोटो साझा करते हुए लिखा:
“आज कांग्रेस अध्यक्ष खरगे जी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी के साथ एक गर्मजोशी भरी, रचनात्मक चर्चा हुई। हम सब एक ही पेज पर हैं और देश की सेवा के लिए आगे बढ़ रहे हैं।”
इस बयान से यह स्पष्ट संदेश गया कि पार्टी के भीतर चल रही आशंकाओं को दरकिनार कर थरूर नेतृत्व के साथ सामंजस्य बनाये रखना चाहते हैं।
कांग्रेस में एकता का संदेश
शशि थरूर ने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा कांग्रेस पार्टी के लिए काम किया है और पार्टी की चुनावी और जनसेवी गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है। उनके अनुसार, “जहाँ-जहाँ भी पार्टी को ज़रूरत पड़ी है, मैं हमेशा उसके लिए काम करता आया हूँ।”
वे लगातार यह भी दोहराते रहे कि उनके और पार्टी के बीच कोई असमंजस या विद्वेष नहीं है, और किसी भी मतभेद को पार्टी के अंदर ही सही मंच पर हल किया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से।
केरल विधानसभा चुनाव की चर्चाएँ और थरूर की भूमिका
मुलाकात के दौरान पत्रकारों ने थरूर से पूछा कि क्या केरल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री उम्मीदवार पर चर्चा हुई? इस पर थरूर ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ऐसा कोई मुद्दा बैठक में उठाया तक नहीं गया और न ही उन्होंने इस बारे में कोई इच्छा जताई है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल वे कांग्रेस सांसद के रूप में ही अपने मतदाताओं की सेवा करना चाहते हैं और किसी पद या मुख्यमंत्री चेहरे की दावेदारी में रुचि नहीं रखते।

पार्टी में चल रही अटकलों का परिदृश्य
पिछले कुछ हफ्तों में राजनीतिक गलियारों में यह कहा जा रहा था कि थरूर पार्टी के कुछ निर्णयों से असंतुष्ट हैं, खासकर उन कार्यक्रमों को लेकर जिनमें उन्हें नजरअंदाज़ किया गया था। खासकर एक पार्टी के कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा थरूर का नाम न लेने की चर्चाएँ खूब उभरी थीं।
जिनके कारण यह अटकलें लगीं कि थरूर नेतृत्व से नाराज हैं या कहीं वे अलग राह़ चुन सकते हैं। हालांकि अब इस बैठक और बयान के बाद यह धारणा काफी हद तक समाप्त होती दिख रही है।
क्या यह सिर्फ मीडिया अटकलों का जवाब है?
थरूर ने मीडिया से कहा कि पार्टी नेतृत्व के साथ संवाद हमेशा खुला और सकारात्मक रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मुद्दों पर उन्हें अपनी बात रखनी थी, वे पहले से तय कार्यक्रमों और संसदीय शेड्यूल के वजह से बैठक में उठाए गए, और उन पर समाधान के लिए द्विपक्षीय चर्चा हुई।
उनका स्पष्ट बयान यह रहा कि मतभेदों की खबरें ज्यादातर मीडिया की अफवाहों या अटकलों पर आधारित थीं, और वास्तविकता यह है कि “हम सब एक साथ कांग्रेस की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
कांग्रेस के लिए इस बैठक का मायने
- एकता का संदेश: यह बैठक कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच एकता का संकेत देती है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी को अलग-अलग विपक्षी कारकों से चुनौती मिल रही है।
- नेतृत्व में सामंजस्य: थरूर, खरगे और राहुल गांधी के बीच सकारात्मक संवाद से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में सामंजस्य बरकरार है।
- आने वाले चुनावों की तैयारी: केरल समेत अन्य राज्यों में चुनावों के मद्देनज़र यह बैठक संगठन की मजबूती और साझा रणनीति का संकेत देती है।
सोशल मीडिया के ज़रिये मजबूत संदेश
शशि थरूर ने बैठक के बाद अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी स्पष्ट रूप से कहा कि वे, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे “एक ही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।” इससे यह संदेश जाता है कि पार्टी में कोई टूट-फूट नहीं है और वरिष्ठ नेता भी पार्टी की अधिकांश नीतियों के साथ आगे हैं।
विश्लेषण: क्या यह मिलने का असर रहेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
- यह बैठक कांग्रेस में बढ़ती अटकलों को शांत करने की कोशिश है।
- इससे पार्टी संगठन की एकजुटता की तस्वीर सामने आती है।
- थरूर की भूमिका अब भी पार्टी के भीतर सम्मानजनक और प्रभावशाली बनी हुई है।
कुल मिलाकर इस मुलाकात ने यह संकेत दिया है कि कांग्रेस नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों को संवाद और बातचीत के जरिये सुलझाया जा रहा है — न कि सार्वजनिक तनाव में बदलने दिया जा रहा है।
निष्कर्ष
शशि थरूर की राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से हुई बैठक ने सियासी गलियारों में चल रही “कांग्रेस में मतभेद” की खबरों में एक मजबूत पलटवार किया है। बैठक के बाद थरूर के स्पष्ट शब्द — “हम सब एक ही पेज पर हैं” — ने पार्टी के भीतर एकता का स्पष्ट संदेश भेजा है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले विधानसभा चुनावों और संसद सत्रों में कांग्रेस इस सामंजस्य को किस तरह आगे बढ़ाती है, लेकिन फिलहाल स्थिति साफ है — कांग्रेस के मुख्य नेतृत्व और शशि थरूर के बीच कोई असहज टकराव नहीं है।
“ I have always campaigned .. I don’t want any post .. not CM” says @ShashiTharoor post meeting rahul gandhi and kharge pic.twitter.com/GimlpKfF6R
— pallavi ghosh (@_pallavighosh) January 29, 2026