National Voters’ Day 2026: राष्ट्रपति Droupadi Murmu का ऐतिहासिक संबोधन, लोकतंत्र, मतदान और राष्ट्र निर्माण पर सशक्त संदेश

जब लोकतंत्र अपने नागरिकों से संवाद करता है

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहां करोड़ों मतदाता अपने एक वोट के जरिए सरकारों का निर्माण और बदलाव करते हैं। यहां लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा, एक भावना और एक सामूहिक जिम्मेदारी है।

16th National Voters’ Day 2026 के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती Droupadi Murmu ने देश को संबोधित करते हुए लोकतंत्र, मतदान अधिकार, नागरिक कर्तव्य और संवैधानिक मूल्यों पर एक प्रेरणादायक और दूरदर्शी संदेश दिया। taazanews24x7.com

उनका यह संबोधन ऐसे समय में आया है, जब भारत न केवल आंतरिक रूप से लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक मजबूत लोकतंत्र के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत कर रहा है।

National Voters’ Day: इतिहास, उद्देश्य और महत्व

National Voters’ Day हर वर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारत के चुनाव आयोग की स्थापना की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है।

इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य है:

  • नागरिकों में मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना
  • युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ना
  • मतदान को केवल अधिकार नहीं, बल्कि कर्तव्य के रूप में स्थापित करना
  • निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि,

“लोकतंत्र की मजबूती केवल संविधान से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों से आती है।”

राष्ट्रपति Droupadi Murmu का संबोधन: लोकतंत्र के लिए प्रेरणास्रोत

1. युवा मतदाताओं से विशेष संवाद

राष्ट्रपति ने अपने भाषण में सबसे अधिक जोर युवा मतदाताओं पर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथ में है और उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी देश की दिशा तय करती है।

उन्होंने यह भी कहा कि:

  • युवा केवल वोट डालने वाले नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता हैं
  • जागरूक युवा लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं
  • सोशल मीडिया के दौर में सत्य और असत्य की पहचान बेहद जरूरी है

राष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि हर समय राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

2. मतदान: अधिकार से अधिक एक पवित्र जिम्मेदारी

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने मतदान को केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि एक नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी बताया।

उन्होंने कहा कि:

  • प्रत्येक वोट देश के भविष्य को प्रभावित करता है
  • मतदान से ही जनता की आवाज सत्ता तक पहुंचती है
  • लोकतंत्र की असली शक्ति मतदाता के विवेक में होती है

उन्होंने यह भी कहा कि यदि नागरिक अपने अधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे, तो लोकतंत्र कमजोर पड़ सकता है।

3. भारतीय चुनाव प्रणाली की वैश्विक प्रतिष्ठा

राष्ट्रपति ने भारतीय चुनाव आयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत की चुनाव प्रणाली दुनिया भर में निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए जानी जाती है।

उन्होंने उल्लेख किया कि:

  • करोड़ों मतदाताओं का शांतिपूर्ण मतदान
  • तकनीकी नवाचार
  • EVM और VVPAT प्रणाली
  • दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएं

ये सभी भारत को लोकतंत्र का वैश्विक मॉडल बनाते हैं।

समावेशी लोकतंत्र: हर वर्ग की भागीदारी

राष्ट्रपति मुर्मु ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब समाज का हर वर्ग उसमें समान रूप से भाग ले।

उन्होंने कहा कि:

  • महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
  • दिव्यांग मतदाताओं के लिए सुविधाएं
  • ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में मतदान
  • आदिवासी समुदाय की भागीदारी

ये सभी भारत के लोकतंत्र को अधिक समावेशी और सशक्त बनाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि,

“लोकतंत्र की सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि कितने लोग मतदान करते हैं, बल्कि इससे कि कौन-कौन मतदान करने में सक्षम बनाया गया।”

डिजिटल युग और लोकतंत्र की चुनौतियां

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने आधुनिक समय की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने विशेष रूप से इन मुद्दों का उल्लेख किया:

  • फेक न्यूज़ और भ्रामक सूचनाएं
  • सोशल मीडिया का दुरुपयोग
  • राजनीतिक ध्रुवीकरण
  • अफवाहों का प्रसार

राष्ट्रपति ने नागरिकों से अपील की कि वे सत्य, तथ्य और विवेक के आधार पर निर्णय लें और लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ताकतों से सावधान रहें।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या और वीरता का सम्मान

राष्ट्रीय मतदाता दिवस और गणतंत्र दिवस का संबंध केवल तारीखों का नहीं, बल्कि मूल्यों का है। लोकतंत्र की रक्षा केवल मतदान से नहीं, बल्कि उन वीर जवानों के बलिदान से भी होती है जो देश की सीमाओं पर तैनात रहते हैं।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्वारा:

  • 2 कीर्ति चक्र
  • 10 शौर्य चक्र
  • अन्य वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कार

की घोषणा इस बात का प्रतीक है कि लोकतंत्र केवल मतपेटियों से नहीं, बल्कि बलिदान, साहस और सेवा से सुरक्षित रहता है।

लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्य: केवल वोट से आगे

राष्ट्रपति मुर्मु ने यह स्पष्ट किया कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है। एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है कि वह:

  • संविधान का सम्मान करे
  • कानून का पालन करे
  • सामाजिक सौहार्द बनाए रखे
  • सहिष्णुता और संवाद को बढ़ावा दे
  • राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

भारत का लोकतंत्र: अतीत, वर्तमान और भविष्य

भारत का लोकतंत्र संघर्ष, बलिदान और संविधान की भावना से जन्मा है। स्वतंत्रता के बाद से लेकर आज तक भारत ने कई चुनौतियों का सामना किया है, लेकिन हर बार लोकतंत्र और मजबूत होकर उभरा है।

राष्ट्रपति के संबोधन में यह संदेश स्पष्ट था कि:

  • अतीत से सीखना जरूरी है
  • वर्तमान को मजबूत बनाना आवश्यक है
  • भविष्य को सुरक्षित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत का लोकतंत्र और अधिक सशक्त, समावेशी और जागरूक बनेगा।

महिलाओं की भूमिका और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण

भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होने के नातेDroupadi Murmu का संबोधन महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत रहा।

उन्होंने यह संकेत दिया कि:

  • महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ रही है
  • पंचायत से संसद तक महिलाओं की भूमिका मजबूत हो रही है
  • महिला मतदाता लोकतंत्र की दिशा बदलने की शक्ति रखती हैं

उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे केवल मतदाता ही नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता भी बनें।

संविधान और लोकतंत्र: अविभाज्य संबंध

राष्ट्रपति ने संविधान की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान केवल कानूनों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है।

उन्होंने कहा कि:

  • संविधान समानता का आधार है
  • स्वतंत्रता की गारंटी है
  • अधिकारों की सुरक्षा है
  • कर्तव्यों की याद दिलाता है

और लोकतंत्र तभी जीवित रहेगा, जब नागरिक संविधान की भावना को समझेंगे और अपनाएंगे।

निष्कर्ष: वोट से राष्ट्र का भविष्य

16th National Voters’ Day के अवसर पर राष्ट्रपति Droupadi Murmu का संबोधन केवल एक औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि यह हर भारतीय के नाम एक जिम्मेदार, प्रेरणादायक और दूरदर्शी संदेश था।

यह संबोधन याद दिलाता है कि:

  • लोकतंत्र की असली ताकत सत्ता में नहीं, जनता में है
  • एक वोट राष्ट्र की दिशा बदल सकता है
  • जागरूक नागरिक ही मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं
  • लोकतंत्र केवल अधिकार नहीं, एक जिम्मेदारी है

आज जब भारत विश्व मंच पर एक सशक्त लोकतंत्र के रूप में उभर रहा है, ऐसे समय में राष्ट्रपति का यह संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेगा।

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