Bharat-Poland कूटनीति: Subrahmanyam Jaishankar का कड़ा संदेश और वैश्विक परिदृश्य

BHARAT के विदेश मंत्री डॉ. Subrahmanyam Jaishankar ने सोमवार को नई दिल्ली में Poland के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के मुद्दों के साथ-साथ वैश्विक राजनीतिक और सुरक्षा संदर्भों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

मुख्य बिंदु: कूटनीति, आतंकवाद और व्यापार

बैठक की शुरुआत में Jaishankar ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि Poland को BHARAT के “पड़ोस में आतंकवाद को बढ़ावा” देने में किसी भी तरह मदद नहीं करनी चाहिए और उसे आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनानी चाहिए। taazanews24x7.com

उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि BHARAT पर चुनिंदा तरीके से ‘सेलेक्टिव टारगेटिंग’, विशेषकर रूस-यूक्रेन मुद्दे और तेल टैरिफ संबंधी निर्णयों के मामले में, अनुचित और अन्यायपूर्ण है।

इस मुद्दे को उठाते हुए Jaishankar ने Poland के विदेश मंत्री के उस हालिया दौरे का जिक्र किया, जब वह पाकिस्तान गए थे और संयुक्त बयान में कश्मीर मुद्दा भी शामिल रहा था—जिसे BHARAT ने गंभीरता से देखा।

पर्पल भूमि से व्यापक दर्पण तक: भारत Poland रिश्तों का इतिहास

BHARAT और Poland के बीच राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी और पिछले दशकों में ये दोनों देश सांस्कृतिक, व्यापारिक, रक्षा और शिक्षा के कई क्षेत्रों में जुड़े हैं। BHARAT और Poland के बीच व्यापक सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक उदाहरण “डॉबरी महाराजा” की याद दिलाना है—जिसका संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1000 से अधिक पोलिश बच्चों को भारत द्वारा आश्रय देने से है।

ऐतिहासिक रूप से, Poland ने यूरोप में भारतीय संस्कृति और शिक्षाविदों के प्रति सम्मान दिखाया है, विदेशी निवेश और व्यापार के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच लगातार विस्तार हुआ है। Poland सेंटरल यूरोप में BHARAT का एक बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है, जिसमें भारतीय निवेश 3 अरब डॉलर से अधिक पहुँच चुका है और व्यापार लगभग 7 अरब डॉलर का आँकड़ा पार कर चुका है।

यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2024 में Poland की राजधानी वारसा का दौरा किया था, जहां दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को उच्च स्तर पर स्थापित किया—जो आज दोनों के संबंधों की मजबूत नींव है।

Jaishankar की कूटनीति: सीमा पार आतंकवाद पर जोर

बैठक में Jaishankar ने आतंकवाद पर विशेष जोर दिया और Poland को यह स्पष्ट संदेश दिया कि BHARAT सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता से खड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह के आतंकवादी ढांचे का समर्थन या उसके लिए मदद देना भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने यह बात इसलिए बढ़ा-चढ़ाकर कही क्योंकि पिछले कुछ समय में Poland और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संपर्क और सहयोग बढ़ा है, विशेष रूप से सुरक्षा मामलों में। यह वह पहला मौका नहीं है जब BHARAT ने यूरोपीय देशों से आतंकवाद से स्पष्ट दूरी बनाए रखने की मांग की है; इसी कड़ी में जयशंकर ने पोलैंड से यह अपेक्षा जताई है कि वह “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाए।

पोलिश उप प्रधानमंत्री ने भी समझाइश दी कि Poland को भी आतंकवाद की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है—हाल के एक संदर्भ में Poland में रेलवे टर्मिनल धमाका एक उदाहरण है, जिसे उन्होंने आतंकवाद की कड़ी निंदा के रूप में बताया।

आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग: विस्तृत एजेंडा

राजनीतिक मुद्दों के अलावा बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीकी सहयोग, साफ़ तकनीक, डिजिटल इनोवेशन, और सफाई तथा ‘Action Plan 2024–28’ के तहत भविष्य की रणनीति पर भी विचार हुआ। यह कदम दोनों देशों के बीच न केवल नजदीकी रिश्तों को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में साझेदारी को भी बल देगा।

व्यापारिक दृष्टिकोण

BHARAT और Poland दोनों ही स्टार्टअप, निवेश और औद्योगिक क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं। Poland के उप प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि Poland नई व्यापार साझेदारियों की तलाश में है, और BHARAT को एक भरोसेमंद और विश्वसनीय कारोबारी साथी के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक और वैश्विक कूटनीतिक संदर्भ

Jaishankar ने वैश्विक परिदृश्य को मध्य पूर्व, यूरोप और एशिया-प्रशांत में बदलते संतुलन के संदर्भ में देखा और कहा कि BHARAT और Poland को एक दूसरे के दृष्टिकोण को समझना और साझा करना चाहिए। इसके तहत उन्होंने यूक्रेन संकट, रूस तथा टैरिफ विवाद और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों पर भी विचार व्यक्त किए।

BHARAT ने यह स्पष्ट किया कि जो भी अंतरराष्ट्रीय नीतियाँ लागू की जा रही हैं—जैसे रूस से तेल पर टैरिफ—उनका भार विकसित देशों के बजाय उन पर नहीं डाला जाना चाहिए जिनका निर्णय अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर हुआ है। जयशंकर ने इसे “अनुचित और चुनिंदा निशाना” करार दिया।

BHARAT Poland रिश्तों में संतुलन या तनाव?

कई राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक की तुलना पिछले वर्षों के परिप्रेक्ष्य से की जानी चाहिए। जहाँ BHARAT और Poland के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत रहे हैं, वहीं सुरक्षा और रणनीतिक संदर्भों पर मतभेद की संभावना बनी हुई है। Poland द्वारा पाकिस्तान के साथ हालिया सार्वजनिक बातचीत और संयुक्त बयान ने भारत में चिंताएँ बढ़ाई हैं—जिसे Jaishankar ने स्पष्ट शब्दों में उठाया है।

दूसरी ओर, Poland ने भी BHARAT की निष्पक्षता और स्वतंत्र विदेश नीति के प्रति सम्मान व्यक्त किया है, और यह संकेत दिया है कि वह दोनों देशों के बीच स्वतंत्रतापूर्वक समर्थन और सहयोग बढ़ाने के पक्ष में है—जिससे द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाएँ बनी रह सकती हैं।

निष्कर्ष: कूटनीति, सुरक्षा और भविष्य

डॉ. S. Jaishankar की यह बैठक महज एक औपचारिक राजनयिक मुलाकात नहीं थी; यह उन व्यापक पहलों का संकेत है जो भारत आज वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी, और रणनीतिक स्थिरता को लेकर उठा रहा है। आतंकवाद के खिलाफ BHARAT का रुख स्पष्ट है—देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी चाहता है।

दूसरी ओर, Poland के साथ मजबूत व्यापार और तकनीकी सहयोग के द्वार खुले हैं। दोनों देशों को यह समझना है कि सीमित मतभेदों को छाँटते हुए साझा हितों पर ध्यान देना ही भविष्य की कूटनीति की कुंजी है।

अंततः यह बैठक भारत Poland रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा देने के मार्ग पर है—जहाँ सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक राजनीतिक संतुलन साथ-साथ चलेंगे

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