भारत–UAE संबंधों में ऐतिहासिक मोड़
संयुक्त अरब अमीरात UAE के PRESIDENT SHEKH MOHAMED BIN ZAYED AL NAHYAN की भारत की प्रस्तावित आधिकारिक यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब भारत और UAE के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग लगातार गहराता जा रहा है। taazanews24x7.com
सरकारी स्तर पर हुई घोषणा के अनुसार, यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य व्यापक रणनीतिक साझेदारी Comprehensive Strategic Partnership को और मजबूत करना है।
यात्रा की आधिकारिक घोषणा और पृष्ठभूमि
भारत सरकार और UAE नेतृत्व दोनों ने संकेत दिए हैं कि यह यात्रा दीर्घकालिक द्विपक्षीय एजेंडे को ध्यान में रखते हुए तय की गई है । इससे पहले भी शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं , जिनमें आपसी विश्वास और मित्रता स्पष्ट रूप से दिखाई दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत–पश्चिम एशिया संबंधों की दिशा तय करने वाला कदम साबित हो सकती है।
भारत–UAE साझेदारी का उद्देश्य क्या है?
आर्थिक सहयोग को नई गति
भारत और UAE के बीच व्यापारिक रिश्ते पहले से ही मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और UAE भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है । इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य है:
- CEPA Comprehensive Economic Partnership Agreement के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा
- व्यापार बाधाओं को कम करना
- स्टार्टअप, MSME और फिनटेक सेक्टर में सहयोग बढ़ाना
निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी
UAE भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी , लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा निवेशक रहा है। इस यात्रा में:
- सॉवरेन वेल्थ फंड के जरिए नए निवेश
- स्मार्ट सिटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सहयोग
- ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर एनर्जी परियोजनाओं पर चर्चा
जैसे मुद्दों पर सहमति बनने की संभावना है।
रणनीतिक और रक्षा सहयोग पर फोकस
भारत और UAE के बीच रक्षा सहयोग बीते वर्षों में काफी मजबूत हुआ है। दोनों देश:
- संयुक्त सैन्य अभ्यास
- रक्षा उत्पादन में सहयोग
- समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी रणनीति
पर पहले से साथ काम कर रहे हैं।
इस यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग को और संस्थागत रूप देने , खुफिया जानकारी साझा करने और इंडियन ओशन रीजन IOR में स्थिरता बनाए रखने पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है।

ऊर्जा सुरक्षा: भारत के लिए UAE की भूमिका
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है और UAE इसमें एक विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार रहा है। कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति के अलावा अब दोनों देश:
- रिन्यूएबल एनर्जी
- क्लीन फ्यूल
- स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व
जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं।
शेख मोहम्मद बिन ज़ायद की यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए एक केंद्रीय एजेंडा रहने वाली है।
तकनीक, AI और भविष्य की साझेदारी
UAE खुद को एक AI और फ्यूचर टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित कर रहा है, वहीं भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक पहचान बना चुका है।
इस दौरे में:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- सेमीकंडक्टर
- साइबर सिक्योरिटी
- स्पेस टेक्नोलॉजी
क्षेत्रों में साझेदारी के नए रास्ते खुल सकते हैं।
भारतीय प्रवासी और जन-से-जन संपर्क
UAE में लगभग 35 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत नींव हैं। शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान भारतीय समुदाय के योगदान की खुले तौर पर सराहना करते रहे हैं।
इस यात्रा के दौरान:
- प्रवासी भारतीयों के कल्याण
- स्किल डेवलपमेंट
- श्रम सुधार और रोजगार सुरक्षा
पर भी बातचीत होने की संभावना है।
सांस्कृतिक और सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी
भारत और UAE के संबंध केवल रणनीति और व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश:
- योग
- संस्कृति
- शिक्षा
- पर्यटन
के जरिए भी एक-दूसरे के करीब आए हैं।
अबू धाबी में बने हिंदू मंदिर और भारत में UAE की सांस्कृतिक पहलें इस सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का जीवंत उदाहरण हैं।
क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ में यात्रा का महत्व
यह यात्रा केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में बदलते समीकरण वैश्विक ऊर्जा संकट और मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर के बीच भारत–UAE साझेदारी:
- क्षेत्रीय स्थिरता
- आर्थिक संतुलन
- आतंकवाद विरोधी प्रयासों
में अहम भूमिका निभा सकती है ।
भारत की “Act West Policy” और UAE
भारत की “Act West Policy” में UAE एक प्रमुख स्तंभ है । यह यात्रा इस नीति को और मजबूती देती है और यह संकेत देती है कि भारत पश्चिम एशिया को केवल ऊर्जा स्रोत नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।
क्या निकल सकता है इस यात्रा का परिणाम?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस यात्रा के बाद:
- कई MoU और समझौते
- दीर्घकालिक निवेश योजनाएँ
- रक्षा और तकनीकी सहयोग की नई रूपरेखा
सामने आ सकती है। यह दौरा भारत–UAE संबंधों को रणनीतिक से ट्रांसफॉर्मेशनल साझेदारी की ओर ले जाने वाला साबित हो सकता है।

निष्कर्ष: रिश्तों की नई परिभाषा
UAE के PRESIDENT SHEKH MOHAMED BIN ZAYED AL NAHYAN की भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में विश्वास, निरंतरता और भविष्य की साझेदारी का प्रतीक है। यह केवल आज की जरूरतों को नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की रणनीति को ध्यान में रखकर की जा रही पहल है।
भारत और UAE मिलकर न केवल अपने नागरिकों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए स्थिरता, विकास और समृद्धि का नया मॉडल प्रस्तुत कर सकते हैं।
FAQ:
Q1. UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद भारत क्यों आ रहे हैं?
UAE राष्ट्रपति की यह यात्रा भारत–UAE के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है।
Q2. इस यात्रा में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?
इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी और भारतीय प्रवासियों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होगी।
Q3. भारत और UAE के रिश्ते कितने महत्वपूर्ण हैं?
UAE भारत का प्रमुख व्यापारिक और रणनीतिक साझेदार है। दोनों देशों के रिश्ते व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुँच चुके हैं।
Q4. क्या इस यात्रा के दौरान कोई समझौता होगा?
संभावना है कि इस दौरे में कई MoU, निवेश समझौते और रक्षा व तकनीकी सहयोग से जुड़े करार किए जाएंगे।
Q5. भारत–UAE CEPA का क्या महत्व है?
CEPA समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है और निवेश को नई गति मिली है, जिससे आर्थिक रिश्ते और मजबूत हुए हैं।
Q6. भारतीय प्रवासियों के लिए इस यात्रा का क्या मतलब है?
UAE में रहने वाले लाखों भारतीयों के हित, रोजगार सुरक्षा और कौशल विकास इस यात्रा के अहम एजेंडे में शामिल हैं।
