खगोल विज्ञान के इतिहास में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं, जो सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी रोमांच और जिज्ञासा का विषय बन जाती हैं। 2 अगस्त 2027 ऐसी ही एक ऐतिहासिक तारीख बनने जा रही है। इस दिन दुनिया सदी के सबसे लंबे पूर्ण Surya Grahan (Longest Total Solar Eclipse of the Century) की साक्षी बनेगी, जब चंद्रमा सूर्य को पूरे 6 मिनट 23 सेकंड तक पूरी तरह ढक लेगा। taazanews24x7.com
वहीं, इससे पहले साल 2026 में भी Surya Grahan की खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी, जिनमें फरवरी महीने में लगने वाला ‘रिंग ऑफ फायर’ (Annular Solar Eclipse) सबसे ज्यादा चर्चा में है। ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं—
- Surya Grahan होता कैसे है?
- 2027 का ग्रहण इतना खास क्यों है?
- क्या भारत में यह ऐतिहासिक ग्रहण दिखाई देगा?
- 2026 में कितने Surya Grahan लगेंगे और सूतक काल मान्य होगा या नहीं?

इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको Total Solar Eclipse 2027 और Surya Grahan 2026 से जुड़ी हर अहम जानकारी विस्तार से बताएंगे।
Surya Grahan क्या होता है? (What is Solar Eclipse)
Surya Grahan तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता। यह घटना अमावस्या के दिन ही संभव होती है।
सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं—
- पूर्ण Surya Grahan (Total Solar Eclipse)
- आंशिक Surya Grahan (Partial Solar Eclipse)
- वलयाकार Surya Grahan (Annular Solar Eclipse)
पूर्ण सूर्य ग्रहण सबसे दुर्लभ और सबसे रोमांचक माना जाता है, क्योंकि इसमें दिन में ही कुछ मिनटों के लिए अंधेरा छा जाता है।
2 अगस्त 2027: सदी का सबसे लंबा पूर्ण Surya Grahan
क्यों खास है यह ग्रहण?
2 अगस्त 2027 को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि—
- यह 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण Surya Grahan होगा
- कुलता (Totality) की अवधि 6 मिनट 23 सेकंड तक रहेगी
- आमतौर पर पूर्ण Surya Grahan कुछ सेकंड या 2–3 मिनट का ही होता है
इतनी लंबी अवधि का पूर्ण Surya Grahan आखिरी बार कई दशकों पहले देखा गया था और अगली बार ऐसा दृश्य देखने के लिए आने वाली पीढ़ियों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
कहां-कहां दिखेगा Total Solar Eclipse 2027?
यह ऐतिहासिक Surya Grahan दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। ग्रहण का पथ (Path of Totality) मुख्य रूप से—
- उत्तरी अफ्रीका
- मध्य पूर्व
- दक्षिणी यूरोप के कुछ हिस्से
से होकर गुजरेगा।
क्या भारत में दिखेगा 2027 का पूर्ण सूर्य ग्रहण?
सबसे अहम सवाल यही है।
उत्तर है – नहीं।
भारत में 2 अगस्त 2027 का पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। भारत इस ग्रहण के पूर्णता पथ से बाहर रहेगा। कुछ क्षेत्रों में आंशिक रूप से भी इसके दर्शन संभव नहीं माने जा रहे हैं।
हालांकि, भारतीय खगोल प्रेमी इसे लाइव स्ट्रीमिंग और वैज्ञानिक प्रसारण के जरिए देख सकेंगे।
दिन में अंधेरा कैसे छा जाता है?
पूर्ण Surya Grahan के दौरान—
- अचानक तापमान गिर जाता है
- पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं
- तारे और ग्रह दिखने लगते हैं
- आसमान में अद्भुत कोरोना (Corona) दिखाई देता है
यही कारण है कि इसे प्रकृति के सबसे रहस्यमयी और सुंदर दृश्यों में गिना जाता है।

Surya Grahan 2026: फरवरी में लगेगा साल का पहला Surya Grahan
अब बात करते हैं साल 2026 की, जो खगोल विज्ञान के लिहाज से भी खास रहेगा।
फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण
फरवरी 2026 में लगने वाला Surya Grahan वलयाकार Surya Grahan (Annular Solar Eclipse) होगा। इसे ही आम भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
इस दौरान—
- चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता
- सूर्य का बाहरी हिस्सा एक चमकदार छल्ले की तरह दिखाई देता है
- यह दृश्य बेहद दुर्लभ और आकर्षक होता है
क्या भारत में दिखेगा Surya Grahan 2026?
फरवरी 2026 में लगने वाला Surya Grahan भारत में दिखाई नहीं देगा।
इसी कारण—
- सूतक काल मान्य नहीं होगा
- धार्मिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तब सूतक काल लागू नहीं होता।
सूतक काल क्या होता है?
सूतक काल सूर्य या चंद्र ग्रहण से पहले शुरू होने वाला वह समय होता है, जब—
- पूजा-पाठ वर्जित माना जाता है
- मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं
- खाने-पीने से परहेज किया जाता है
Surya Grahan का सूतक आमतौर पर 12 घंटे पहले शुरू होता है, लेकिन यह तभी मान्य होता है जब ग्रहण भारत में दिखाई दे।
Surya Grahan से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य
- Surya Grahan पृथ्वी के लिए हानिकारक नहीं होता
- आंखों से सीधे सूर्य को देखना खतरनाक हो सकता है
- वैज्ञानिक ग्रहण के दौरान सूर्य के कोरोना का अध्ययन करते हैं
- NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां इस समय विशेष रिसर्च करती हैं
धार्मिक मान्यताएं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
जहां एक ओर धार्मिक ग्रंथों में सूर्य ग्रहण को अशुभ घटनाओं से जोड़ा गया है, वहीं आधुनिक विज्ञान इसे पूरी तरह प्राकृतिक खगोलीय घटना मानता है।
आज के समय में—
- गर्भवती महिलाओं को लेकर फैली कई धारणाओं को वैज्ञानिक आधार नहीं मानते
- सही सुरक्षा उपायों के साथ ग्रहण देखना सुरक्षित है
Surya Grahan देखने के सुरक्षित तरीके
अगर आप Surya Grahan देखना चाहते हैं तो—
- ISO प्रमाणित सोलर ग्लासेस का इस्तेमाल करें
- एक्स-रे फिल्म, मोबाइल या नंगी आंखों से सूर्य न देखें
- पिनहोल कैमरा एक सुरक्षित तरीका है

2027 का Surya Grahan क्यों कहलाएगा ऐतिहासिक?
- सबसे लंबी कुलता अवधि
- दुर्लभ खगोलीय संयोग
- वैज्ञानिक शोध के लिए सुनहरा अवसर
- आम लोगों के लिए प्रकृति का अद्भुत चमत्कार
यही वजह है कि 2 अगस्त 2027 की तारीख खगोल विज्ञान के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज की जाएगी।
निष्कर्ष
Surya Grahan सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि विज्ञान, आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है।
जहां 2026 का Surya Grahan ‘रिंग ऑफ फायर’ के कारण चर्चा में रहेगा, वहीं 2027 का पूर्ण Surya Grahan सदी का सबसे लंबा ग्रहण बनकर इतिहास रचेगा।
भारत में भले ही ये ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से न दिखें, लेकिन इनका वैज्ञानिक और खगोलीय महत्व पूरी दुनिया के लिए बेहद खास रहेगा।
The next total solar eclipse will occur on Aug. 12, 2026, mostly passing over the Arctic Ocean.
— Massimo (@Rainmaker1973) April 9, 2024
Totality will be visible along a path that cuts through Russia, eastern Greenland, the western coast of Iceland, Spain and a tiny part of Portugal. pic.twitter.com/vtnzN4b4uM