ARTEMIS-2 MISSIONकी उलटी गिनती शुरू लॉन्च पैड की ओर बढ़ा नासा का सबसे शक्तिशाली SLS रॉकेट, 50 साल बाद चंद्रमा के करीब पहुंचेगा इंसान

करीब आधी सदी बाद मानवता एक बार फिर चंद्रमा की ओर बढ़ने को तैयार है। 17 जनवरी 2026 को अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अंतरिक्ष इतिहास का एक और बड़ा अध्याय लिखने की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिया। नासा ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट Space Launch System (SLS) और अत्याधुनिक Orion स्पेसक्राफ्ट को फ्लोरिडा स्थित Vehicle Assembly Building (VAB) से लॉन्च पैड की ओर ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। taazanews24x7.com

यह तैयारी सिर्फ एक तकनीकी गतिविधि नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि Artemis-2 Mission अब कागजों और परीक्षणों से निकलकर वास्तविक उड़ान के बेहद करीब पहुंच चुका है।  जिससे 50 सालों बाद इंसानों का चांद के करीब जाना और भविष्य के चंद्र-मंगल अभियानों के लिए ओरियन यान की प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा। यह 10 दिन का मिशन है और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति की नींव रखी जाएगी। 

आर्टेमिस-2 मिशन: सिर्फ उड़ान नहीं, भविष्य की नींव

आर्टेमिस-2 नासा के महत्वाकांक्षी Artemis Program का दूसरा चरण है। यह मिशन खास इसलिए है क्योंकि इसमें पहली बार इंसानों को Orion स्पेसक्राफ्ट में बैठाकर चंद्रमा की ओर भेजा जाएगा

यह मिशन चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं करेगा, लेकिन चंद्रमा के चारों ओर इंसानों के साथ उड़ान भरकर भविष्य के मिशनों के लिए सबसे अहम डेटा जुटाएगा।

आर्टेमिस प्रोग्राम के चरण:

  • Artemis-1: बिना इंसानों का परीक्षण मिशन (पूरा हो चुका)
  • Artemis-2: इंसानों के साथ चंद्रमा की परिक्रमा
  • Artemis-3: चंद्रमा पर इंसानों की ऐतिहासिक लैंडिंग

1972 के बाद पहली बार इंसान चंद्रमा के करीब

दिसंबर 1972 में Apollo-17 मिशन के बाद इंसान ने चंद्रमा की यात्रा बंद कर दी थी। इसके बाद तकनीक बदली, दुनिया बदली, लेकिन चंद्रमा तक मानव की वापसी नहीं हो पाई।

अब लगभग 50 साल बाद, ARTEMIS-2 MISSIONके जरिए इंसान फिर से चंद्रमा के बेहद करीब पहुंचेगा। यह सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानव जिज्ञासा और साहस की वापसी है।

दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट: SLS की शक्ति

Space Launch System (SLS) को नासा ने खास तौर पर डीप स्पेस मिशनों के लिए विकसित किया है। यह रॉकेट आज के समय में दुनिया का सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल माना जाता है।

SLS रॉकेट की प्रमुख विशेषताएं:

  • ऊंचाई: लगभग 98 मीटर
  • कुल वजन: 26 लाख किलोग्राम से ज्यादा
  • अधिकतम गति: 39,000 किमी प्रति घंटा
  • क्षमता: 11 लाख किलोमीटर से ज्यादा का सफर
  • इंजन: RS-25 (Space Shuttle से विकसित)

इतनी ताकत किसी और सक्रिय रॉकेट में फिलहाल देखने को नहीं मिलती।

Orion स्पेसक्राफ्ट: इंसानों का सुरक्षित किला

ARTEMIS-2 MISSIONमें अंतरिक्ष यात्री Orion स्पेसक्राफ्ट में सवार होंगे। Orion को खास तौर पर डीप स्पेस के खतरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

Orion की खासियतें:

  • लंबी अवधि तक अंतरिक्ष में रहने की क्षमता
  • अत्याधुनिक लाइफ-सपोर्ट सिस्टम
  • रेडिएशन से बचाव की विशेष तकनीक
  • पृथ्वी के वायुमंडल में तेज रफ्तार से लौटने की क्षमता
  • अब तक की सबसे मजबूत हीट शील्ड

नासा का दावा है कि Orion, Apollo कैप्सूल की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित और आधुनिक है।

लॉन्च पैड तक रॉकेट ले जाना क्यों अहम है?

17 जनवरी को SLS और Orion को VAB से बाहर निकालना एक बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है। इसे Rollout Process कहा जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान:

  • अंतिम तकनीकी परीक्षण
  • लॉन्च सिस्टम का संतुलन
  • ईंधन से पहले सुरक्षा जांच
  • मौसम और संरचना का मूल्यांकन

किया जाता है। यह कदम बताता है कि मिशन अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

फरवरी से शुरू होगा ‘Moon Mission’ का निर्णायक दौर

नासा के अनुसार, फरवरी 2026 से ARTEMIS-2 MISSIONके लिए सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियां शुरू होंगी।

इनमें शामिल हैं:

  • काउंटडाउन रिहर्सल
  • आपातकालीन सिमुलेशन
  • क्रू सेफ्टी टेस्ट
  • लॉन्च विंडो की अंतिम पुष्टि

यही वह चरण होता है जहां मिशन की सफलता या विफलता तय होती है।

कौन होंगे आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्री?

नासा ने पहले ही चार अंतरिक्ष यात्रियों की घोषणा कर दी है। ये सभी अनुभवी एस्ट्रोनॉट्स हैं, जिन्होंने पहले भी अंतरिक्ष मिशनों में हिस्सा लिया है।

इनका प्रशिक्षण:

  • ज़ीरो ग्रैविटी
  • इमरजेंसी लैंडिंग
  • मानसिक सहनशीलता
  • डीप स्पेस नेविगेशन

जैसे कठिन परीक्षणों से होकर गुजर चुका है।

कितना खतरनाक है डीप स्पेस मिशन?

पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाना हमेशा जोखिम भरा होता है।

प्रमुख चुनौतियां:

  • अंतरिक्ष विकिरण
  • माइक्रो-ग्रैविटी का असर
  • तकनीकी खराबी
  • मानसिक दबाव

इसीलिए आर्टेमिस-2 को अब तक का सबसे सुरक्षित मानव मिशन बनाने पर जोर दिया गया है।

भारत और दुनिया की दिलचस्पी क्यों?

ARTEMIS-2 MISSIONपर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। भारत समेत कई देश इस मिशन से मिलने वाले डेटा का उपयोग अपने भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों में करेंगे।

ISRO पहले ही संकेत दे चुका है कि आर्टेमिस मिशन से मिली जानकारियां गगनयान और भविष्य के चंद्र अभियानों में मददगार होंगी।

चंद्रमा क्यों बना भविष्य का केंद्र?

नासा अब चंद्रमा को सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि स्पेस बेस के रूप में देख रहा है।

चंद्रमा से जुड़े बड़े प्लान:

  • स्थायी मानव उपस्थिति
  • स्पेस स्टेशन (Lunar Gateway)
  • मंगल मिशन का लॉन्च पॉइंट
  • संसाधनों की खोज

आर्टेमिस-2 इसी सोच की पहली मजबूत कड़ी है।

मंगल की राह चंद्रमा से क्यों?

सीधे मंगल जाना बेहद जोखिम भरा है। नासा पहले चंद्रमा पर तकनीक, मानव सहनशीलता और संसाधनों का परीक्षण करना चाहता है।

आर्टेमिस-2 इस दिशा में सबसे अहम कदम है।

क्या बदलेगा आर्टेमिस-2 की सफलता से?

अगर यह मिशन सफल रहता है, तो:

  • आर्टेमिस-3 की लॉन्च डेट तय होगी
  • इंसान फिर चंद्रमा पर कदम रखेगा
  • डीप स्पेस मिशनों की रफ्तार बढ़ेगी
  • अंतरिक्ष में नई महाशक्ति की

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