तमिल सिनेमा एक बार फिर सामाजिक-राजनीतिक बहस के केंद्र में है। निर्देशक की नई फिल्म ‘पराशक्ति’ (Parasakthi)’ रिलीज़ के साथ ही चर्चा में आ गई है। वजह साफ है—एक ओर फिल्म में रवि मोहन और शिवकार्तिकेयन जैसे दमदार कलाकार हैं, तो दूसरी ओर इसकी कहानी तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलनों और उससे जुड़े सामाजिक-राजनीतिक माहौल को बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश करती है। फैंस जहां अभिनय के कायल नजर आ रहे हैं, वहीं समीक्षक कहानी की कमजोर पकड़ को लेकर सवाल उठा रहे हैं। taazanews24x7.com
तो क्या ‘PARASAKTHI’ शिवकार्तिकेयन के करियर की एक और यादगार फिल्म है, या फिर शानदार परफॉर्मेंस के बावजूद यह फिल्म दर्शकों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाती? आइए विस्तार से जानते हैं।
Parasakthi: सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक राजनीतिक संदर्भ
‘PARASAKTHI’ को समझने के लिए इसके ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को समझना जरूरी है। तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे संस्कृति, पहचान और आत्मसम्मान की लड़ाई थे। फिल्म इसी भावना को पकड़ने की कोशिश करती है।
कहानी ऐसे समय में घटित होती है जब राज्य में भाषा को लेकर तनाव बढ़ रहा है। आम लोग असमंजस में हैं—एक ओर सत्ता का दबाव, दूसरी ओर अपनी जड़ों से जुड़े रहने की जिद। इसी माहौल में उभरता है शिवकार्तिकेयन का किरदार, जो शुरुआत में एक साधारण युवक है, लेकिन हालात उसे आंदोलन का चेहरा बना देते हैं।
कहानी: मजबूत विचार, लेकिन बिखरा हुआ प्रस्तुतीकरण
कहानी का विचार निस्संदेह दमदार है। निर्देशक यह दिखाना चाहते हैं कि कैसे राजनीतिक फैसले आम आदमी की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी यहीं सामने आती है—पटकथा में कसावट की कमी।
पहले हाफ में कहानी बेहद धीरे चलती है। कई दृश्य लंबे खिंच जाते हैं, जिससे दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ने से पहले ही धैर्य खो सकता है। दूसरे हाफ में अचानक घटनाओं की बाढ़ आ जाती है—आंदोलन, टकराव, भाषण—सब कुछ तेजी से होता है, लेकिन गहराई कहीं छूट जाती है।
कई समीक्षकों का मानना है कि अगर फिल्म का फोकस कुछ चुनिंदा किरदारों और घटनाओं पर रहता, तो असर कहीं ज्यादा गहरा होता।

शिवकार्तिकेयन का अभिनय: फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
अगर ‘PARASAKTHI’ को देखने की सबसे बड़ी वजह कोई है, तो वह हैं शिवकार्तिकेयन। कॉमेडी और हल्के-फुल्के किरदारों से पहचान बनाने वाले शिवकार्तिकेयन यहां पूरी तरह अलग अवतार में नजर आते हैं।
- उनके संवादों में गुस्सा है
- आंखों में व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह
- और बॉडी लैंग्वेज में एक सच्चे जननेता की झलक
खासकर कोर्टरूम और आंदोलन से जुड़े दृश्यों में शिवकार्तिकेयन दर्शकों को बांध लेते हैं। सोशल मीडिया पर फैंस लिख रहे हैं कि “कहानी भले कमजोर हो, लेकिन शिवकार्तिकेयन ने फिल्म को अपने कंधों पर उठा लिया है।”
रवि मोहन का किरदार: संयमित और प्रभावशाली
रवि मोहन का अभिनय फिल्म को गंभीरता देता है। वह अपने रोल में न तो ज्यादा ओवरड्रामेटिक होते हैं और न ही फीके पड़ते हैं। उनका किरदार सत्ता, सिस्टम और व्यक्तिगत द्वंद्व के बीच फंसा हुआ नजर आता है।
हालांकि उनके स्क्रीन टाइम को लेकर कुछ दर्शकों को शिकायत है। कई समीक्षकों का मानना है कि अगर रवि मोहन के किरदार को और गहराई से लिखा जाता, तो फिल्म का राजनीतिक पक्ष ज्यादा मजबूत हो सकता था।
निर्देशन और पटकथा: अच्छी सोच, कमजोर क्रियान्वयन
निर्देशक की मंशा साफ है—एक संवेदनशील विषय को बड़े स्तर पर दिखाना। लेकिन पटकथा की कमजोरी फिल्म को पूरी ऊंचाई तक पहुंचने नहीं देती।
- पहले हाफ में कहानी धीमी है
- दूसरे हाफ में घटनाएं अचानक तेजी पकड़ लेती हैं
- कई सीन प्रभाव छोड़ने से पहले ही खत्म हो जाते हैं
हिंदी विरोधी आंदोलनों जैसे जटिल विषय को और गहराई से दिखाया जा सकता था, लेकिन फिल्म कई बार सतही लगती है।
संगीत और बैकग्राउंड स्कोर
‘PARASAKTHI’ का संगीत कहानी के मूड के मुताबिक है। बैकग्राउंड स्कोर आंदोलन और भावनात्मक दृश्यों में असरदार है, लेकिन गाने यादगार नहीं बन पाते। कुछ जगह संगीत जरूरत से ज्यादा तेज लगता है, जिससे सीन का असर कम हो जाता है।
Music & Cinematography Review
बैकग्राउंड स्कोर आंदोलनों के दृश्यों में प्रभावी
सिनेमैटोग्राफी यथार्थ के करीब
गाने ज्यादा यादगार नहीं
सोशल मीडिया और फैंस की प्रतिक्रिया
फिल्म रिलीज़ होते ही ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #Parasakthi ट्रेंड करने लगा। फैंस दो हिस्सों में बंटे नजर आए—
पॉजिटिव रिएक्शन:
- “शिवकार्तिकेयन का अब तक का सबसे दमदार अभिनय”
- “राजनीतिक सिनेमा में साहसिक कदम”
नेगेटिव रिएक्शन:
- “कहानी में दम नहीं”
- “इतने बड़े विषय को आधा-अधूरा दिखाया गया”
यानी साफ है कि फिल्म ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर जरूर किया है, लेकिन सभी को खुश नहीं कर पाई।

क्या Parasakthi फैंस को मायूस करती है?
इस सवाल का जवाब आसान नहीं है । अगर आप शिवकार्तिकेयन के फैन हैं या सामाजिक-राजनीतिक सिनेमा में रुचि रखते हैं, तो ‘PARASAKTHI’ आपको जरूर पसंद आएगी । लेकिन अगर आप एक मजबूत, कसावट भरी कहानी की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो शायद थोड़ा मायूस हों।
निष्कर्ष: Parasakthi देखनी चाहिए या नहीं?
‘PARASAKTHI’ एक ऐसी फिल्म है, जो अपने विषय और अभिनय के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहेगी। यह तमिल सिनेमा की उस परंपरा को आगे बढ़ाती है, जहां फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि विचार भी देती हैं।
हालांकि, कमजोर पटकथा और असंतुलित गति इसे महान फिल्म बनने से रोक देती है। फिर भी, शिवकार्तिकेयन और रवि मोहन के अभिनय , और सामाजिक-राजनीतिक साहस के लिए ‘PARASAKTHI’ देखी जानी चाहिए।
रेटिंग अनौपचारिक:
⭐ ⭐ ⭐ 3/5
क्यों देखें?
• शिवकार्तिकेयन का दमदार अभिनय
• सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर आधारित कहानी
क्यों न देखें?
• कमजोर पटकथा
• अधूरा महसूस होता राजनीतिक दृष्टिकोण
कुल मिलाकर
‘Parasakthi’ यह साबित करती है कि अच्छा अभिनय फिल्म को ऊंचाई जरूर देता है, लेकिन मजबूत कहानी के बिना वह पूरी उड़ान नहीं भर पाती। फिर भी, यह एक ऐसी फिल्म है जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं।
FAQ:
Q1. Parasakthi फिल्म किस विषय पर आधारित है?
Parasakthi तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलनों और उससे जुड़े सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों पर आधारित है।
Q2. क्या Parasakthi हिट फिल्म है?
अभिनय और विषय के कारण फिल्म को सराहना मिली है , लेकिन कमजोर कहानी के चलते इसे मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है।
Q3. Parasakthi में शिवकार्तिकेयन का रोल कैसा है?
शिवकार्तिकेयन का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है और इसे उनके करियर की बेहतरीन परफॉर्मेंस में गिना जा रहा है।
Q4. क्या Parasakthi एक राजनीतिक फिल्म है?
हां, यह फिल्म भाषा , पहचान और राजनीति से जुड़े मुद्दों को दर्शाती है।
Q5. Parasakthi फिल्म देखनी चाहिए या नहीं?
अगर आप सामाजिक-राजनीतिक विषयों और दमदार अभिनय वाली फिल्में पसंद करते हैं, तो Parasakthi देखी जा सकती है।

#Parasakthi first public review
— Sangeetha (@Sangeeta_cbe) January 10, 2026
First half very boring unable to sit in seats
Interval block adharva death scene to predictable by child also
Music below average very flat no hype scenes
Climax very worst by director carrer sudha kongra #Sivakarthikeyan average acting ,… pic.twitter.com/PlTNhiwuqs