IEX Market Coupling मामला: भारत के बिजली बाजार की दिशा बदलने वाला सबसे बड़ा विवाद

नई दिल्‍ली, 10 जनवरी 2026

भारत के बिजली बाजार में इन दिनों जिस मुद्दे ने निवेशकों, नियामकों और नीति-निर्माताओं को एक साथ सोचने पर मजबूर कर दिया है, वह है IEX (Indian Energy Exchange) से जुड़ा MARKET COUPLING मामला। यह केवल एक कंपनी बनाम नियामक का विवाद नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि भारत में बिजली की कीमतें कैसे तय होंगी, प्रतिस्पर्धा कितनी होगी और पारदर्शिता का स्तर क्या रहेगाtaazanews24x7.com

पिछले कुछ महीनों में यह मामला अदालतों से लेकर शेयर बाजार तक लगातार चर्चा में रहा है। IEX के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव, निवेशकों की घबराहट और नियामकीय अस्पष्टता ने इस मुद्दे को देश के सबसे संवेदनशील आर्थिक मामलों में बदल दिया है।

IEX MARKET COUPLING क्या है? — आसान भाषा में समझिए

IEX MARKET COUPLING एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें देश के सभी पावर एक्सचेंजों को जोड़कर एक ही प्लेटफॉर्म पर बिजली की कीमत तय की जाती है। अभी तक भारत में अलग-अलग पावर एक्सचेंजों पर बिजली की कीमत अलग-अलग बनती रही है, जिससे कई बार एक ही समय पर अलग राज्यों या प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग दाम देखने को मिलते हैं।

MARKET COUPLING के तहत:

  • सभी एक्सचेंजों की बोलियाँ (bids) एक साथ जोड़ी जाती हैं
  • मांग और आपूर्ति के आधार पर एक समान क्लियरिंग प्राइस तय होती है
  • उपभोक्ताओं और वितरण कंपनियों को एक पारदर्शी मूल्य संकेत मिलता है

सरकार और नियामकों का दावा है कि इससे बिजली सस्ती, प्रतिस्पर्धी और अधिक कुशल बनेगी।

विवाद की जड़: CERC बनाम IEX

CERC का आदेश

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) ने जुलाई 2025 में यह फैसला लिया कि भारत में डेल-अहेड मार्केट (DAM) से MARKET COUPLING की शुरुआत की जाएगी एवं जनवरी 2026 तक लागू की जाएगी। इसके पीछे तर्क दिया गया कि विकसित देशों में यह मॉडल पहले से सफल है और भारत को भी इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

IEX का विरोध

IEX, जो भारत का सबसे बड़ा बिजली एक्सचेंज है और बाजार में लंबे समय से प्रमुख भूमिका निभा रहा है, इस फैसले से सहमत नहीं हुआ। कंपनी का कहना है कि:

  • MARKET COUPLING से मुक्त प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी
  • प्राइस डिस्कवरी की मौजूदा प्रणाली को नुकसान पहुंचेगा
  • बिना पर्याप्त ट्रायल और तकनीकी तैयारी के इसे लागू करना जोखिम भरा है

इसी के चलते IEX ने APTEL (बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण) का दरवाजा खटखटाया।

IEX (Indian Energy Exchange)

APTEL की भूमिका और कानूनी स्थिति

APTEL ने इस मामले में स्पष्ट किया कि जब तक विस्तृत नियम और ढांचा तैयार नहीं होता, तब तक MARKET COUPLING को लागू नहीं किया जा सकता। इसका मतलब यह हुआ कि:

  • CERC को पहले विस्तृत रेगुलेशन बनाने होंगे
  • सभी हितधारकों की राय लेनी होगी
  • तकनीकी और ऑपरेशनल जोखिमों का मूल्यांकन जरूरी होगा

यह फैसला IEX के लिए अस्थायी राहत माना गया, लेकिन अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।

शेयर बाजार में असर: निवेशकों की चिंता

MARKET COUPLING केस का सबसे तात्कालिक असर IEX के शेयरों पर देखने को मिला।

क्यों गिरे शेयर?

  • निवेशकों को डर है कि कपलिंग लागू होने पर IEX की मार्केट डोमिनेंस घट सकती है
  • कंपनी के मुनाफे और मार्जिन पर दबाव आ सकता है
  • भविष्य की ग्रोथ को लेकर स्पष्टता नहीं है

इसी वजह से कई कारोबारी सत्रों में IEX के शेयरों में तेज़ गिरावट और अचानक उछाल दोनों देखने को मिले।

IEX का मौजूदा दबदबा और संभावित नुकसान

आज की तारीख में:

  • IEX का स्पॉट पावर मार्केट में लगभग 80–85% हिस्सा है
  • कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा डेल-अहेड और रियल-टाइम मार्केट से आता है

MARKET COUPLING के बाद:

  • यह प्रभुत्व कमजोर हो सकता है
  • अन्य पावर एक्सचेंजों को बराबरी का मौका मिलेगा
  • IEX की फीस-आधारित कमाई पर असर पड़ सकता है

विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव लंबी अवधि में कंपनी के बिजनेस मॉडल को पूरी तरह बदल सकता है

इनसाइडर ट्रेडिंग जांच और भरोसे का संकट

इस पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े आरोपों ने। आरोप है कि कुछ लोगों को MARKET COUPLING से जुड़े नियामकीय फैसलों की जानकारी पहले से थी और उन्होंने शेयर बाजार में इसका फायदा उठाया।

इस मामले की जांच से:

  • नियामकीय प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे
  • निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ
  • बाजार में डर का माहौल बना

हालांकि जांच अभी जारी है, लेकिन इसका मनोवैज्ञानिक असर पहले ही दिख चुका है।

India electricity market reform

उपभोक्ताओं और DISCOMs के लिए क्या बदलेगा?

MARKET COUPLING को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी है कि आम बिजली उपभोक्ता को इससे क्या फायदा होगा?

संभावित फायदे:

  • बिजली की कीमतों में स्थिरता
  • पारदर्शी मूल्य निर्धारण
  • राज्यों के बीच कीमतों का अंतर कम

संभावित जोखिम:

  • तकनीकी गड़बड़ी से सप्लाई प्रभावित हो सकती है
  • शुरुआती दौर में अस्थिरता
  • छोटे एक्सचेंजों की भूमिका को लेकर भ्रम

यही वजह है कि सरकार और नियामक बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय: पक्ष और विपक्ष

समर्थन में तर्क

  • बाजार अधिक कुशल बनेगा
  • अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था बनेगी
  • उपभोक्ताओं को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा

विरोध में तर्क

  • अचानक बदलाव से बाजार अस्थिर होगा
  • सफल मौजूदा मॉडल को कमजोर किया जा रहा है
  • निवेशकों के हित प्रभावित होंगे

विशेषज्ञ मानते हैं कि सबसे बड़ा सवाल “कैसे” लागू किया जाए, कि “लागू किया जाए या नहीं”

आगे क्या? आने वाले महीनों की तस्वीर

आने वाले समय में:

  • CERC विस्तृत नियम जारी कर सकता है
  • APTEL में अगली सुनवाई अहम होगी
  • सरकार पायलट प्रोजेक्ट या चरणबद्ध लागू करने का रास्ता चुन सकती है

निवेशकों और बाजार के लिए यह समय धैर्य और सतर्कता का है।

निष्कर्ष: सिर्फ एक केस नहीं, पूरे सिस्टम की परीक्षा

IEX MARKET COUPLING मामला सिर्फ एक कंपनी की कानूनी लड़ाई नहीं है। यह भारत के बिजली बाजार की संरचना, नियामकीय सोच और निवेश माहौल की परीक्षा है।

अगर यह सही तरीके से लागू हुआ, तो भारत का ऊर्जा बाजार अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बन सकता है। लेकिन अगर जल्दबाजी हुई, तो इसका असर शेयर बाजार से लेकर उपभोक्ताओं तक पड़ेगा।

यही कारण है कि देश की निगाहें अब इस मामले पर टिकी हैं—क्योंकि इसका फैसला आने वाले वर्षों तक भारत की ऊर्जा नीति की दिशा तय करेगा

FAQ:

Q1. IEX Market Coupling Case क्या है?

IEX MARKET COUPLING केस भारत के बिजली बाजार से जुड़ा एक नियामकीय विवाद है, जिसमें सभी पावर एक्सचेंजों पर एक समान बिजली कीमत तय करने की योजना पर बहस हो रही है।

Q2. MARKET COUPLING लागू क्यों की जा रही है?

सरकार और CERC का मानना है कि इससे बिजली बाजार अधिक पारदर्शी होगा, कीमतों में स्थिरता आएगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

Q3. IEX इस फैसले का विरोध क्यों कर रहा है?

IEX का कहना है कि MARKET COUPLING से उसकी प्राइस डिस्कवरी प्रक्रिया प्रभावित होगी और बिना पूरी तैयारी इसे लागू करना जोखिम भरा है।

Q4. APTEL ने क्या फैसला दिया है?

APTEL ने कहा है कि जब तक स्पष्ट नियम नहीं बनते, तब तक MARKET COUPLING को लागू नहीं किया जा सकता।

Q5. IEX शेयर पर इसका क्या असर पड़ा है?

इस केस के कारण IEX शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है।

Q6. आम बिजली उपभोक्ता को इससे क्या फायदा होगा?

लंबी अवधि में बिजली की कीमतों में स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ने की संभावना है, लेकिन शुरुआती दौर में चुनौतियाँ रह सकती हैं।

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