Silver Price Today: Silver की कीमतों में तूफानी उछाल, पहली बार ₹2.50 लाख के पार

नई दिल्ली
भारतीय सर्राफा बाजार में सोमवार, 29 दिसंबर 2025, को इतिहास रच दिया गया। Silverने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना कुछ महीने पहले तक करना भी मुश्किल था। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर Silver की कीमत पहली बार ₹2.50 लाख प्रति किलो के आंकड़े को पार कर गई। कुछ ही घंटों के कारोबार में Silver ₹12,000 से ₹15,000 प्रति किलो तक महंगी हो गई, जिससे निवेशकों, ट्रेडर्स और ज्वैलरी कारोबारियों के बीच हड़कंप मच गया। taazanews24x7.com

बीते एक हफ्ते में Silver की कीमतों में 15 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है। अगर महीनेभर का आंकड़ा देखें, तो यह उछाल ₹30,000 प्रति किलो से भी ज्यादा का है। सवाल यह है कि आखिर Silver की कीमतों में इतनी जबरदस्त तेजी क्यों आई? क्या यह तेजी टिकाऊ है या फिर जल्द बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है?

Silver Rate Today: आज कितनी है चांदी की कीमत?

सोमवार को MCX पर Silver के मार्च वायदा कॉन्ट्रैक्ट ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए ₹2,53,000 से ₹2,54,000 प्रति किलो का स्तर छू लिया। घरेलू हाजिर बाजार में भी Silver ₹2.55 लाख से ₹2.58 लाख प्रति किलो के आसपास कारोबार करती दिखी।

कुछ शहरों में रिटेल रेट इस प्रकार रहे—

  • दिल्ली: ₹2.50 लाख प्रति किलो के करीब
  • मुंबई: ₹2.51 लाख प्रति किलो
  • चेन्नई: ₹2.52 लाख प्रति किलो
  • कोलकाता: ₹2.50 लाख प्रति किलो
  • बेंगलुरु: ₹2.50–2.51 लाख प्रति किलो

(नोट: रिटेल रेट में जीएसटी, मेकिंग चार्ज और डीलर मार्जिन शामिल नहीं होते)

एक दिन में ₹12,000 महंगी चांदी – निवेशक भी चौंके

सोमवार सुबह बाजार खुलते ही Silver में तेजी का सिलसिला शुरू हो गया। शुरुआती कारोबार में ही silver करीब ₹8,000 प्रति किलो उछल गई। जैसे-जैसे दिन बढ़ा, विदेशी संकेतों और भारी खरीदारी के चलते कीमतों में और उछाल आया और दिन के ऊपरी स्तर पर चांदी ₹12,000 से ज्यादा मजबूत हो गई।

यह तेजी इसलिए भी चौंकाने वाली रही क्योंकि इससे पहले Silver में इतनी बड़ी एकदिनी उछाल बहुत कम देखने को मिली है।

बीते हफ्ते 15% की छलांग – चांदी ने बनाया रिकॉर्ड

अगर सिर्फ पिछले एक हफ्ते का आंकड़ा देखें तो चांदी ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। एक हफ्ते पहले जहां Silver करीब ₹2.20 लाख प्रति किलो के आसपास थी, वहीं अब यह सीधे ₹2.50 लाख के पार पहुंच चुकी है।

यानि सिर्फ सात दिनों में करीब ₹30,000 से ₹31,000 प्रति किलो की बढ़त। इस तेजी ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया है।

चांदी की तेजी के पीछे छिपी 3 बड़ी वजहें

1. ग्लोबल मार्केट में सप्लाई की भारी कमी

Silver की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह है वैश्विक सप्लाई संकट। दुनिया के बड़े चांदी उत्पादक देशों में खनन लागत बढ़ी है और कई माइंस में उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके उलट, चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से चांदी का उत्पादन उसकी मांग के मुकाबले कम रहा है। यह डिमांड-सप्लाई गैप अब कीमतों में साफ दिखने लगा है।

2. औद्योगिक मांग में बेतहाशा उछाल

आज चांदी सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है।

  • सोलर पैनल
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV)
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर
  • ग्रीन एनर्जी सेक्टर

इन सभी में Silver का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। खासकर सोलर एनर्जी सेक्टर में चांदी की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है। चीन, अमेरिका और यूरोप में ग्रीन एनर्जी पर बढ़ते फोकस ने चांदी की मांग को और हवा दी है।

3. सुरक्षित निवेश के तौर पर बढ़ता भरोसा

वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और मंदी की आशंका के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे समय में सोने के साथ-साथ चांदी भी Safe Haven Asset बनकर उभरी है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती की अटकलों ने भी कीमती धातुओं को सपोर्ट दिया है। ब्याज दरें घटने की उम्मीद से डॉलर कमजोर होता है, जिससे सोना-चांदी जैसी धातुएं महंगी होती हैं।

क्या यह बुलबुला है? 1979 जैसी कहानी दोहराएगी चांदी?

कुछ एक्सपर्ट्स चांदी की इस तेजी की तुलना 1979–80 के दौर से कर रहे हैं, जब चांदी ने अचानक आसमान छू लिया था और फिर भारी गिरावट आई थी। हाल ही में कुछ मिनटों के भीतर चांदी में 8% तक की तेज गिरावट भी देखी गई, जिसने निवेशकों को डरा दिया।

हालांकि, बाजार के जानकार मानते हैं कि मौजूदा तेजी पूरी तरह सट्टेबाजी पर आधारित नहीं है। इसके पीछे मजबूत फंडामेंटल कारण मौजूद हैं—खासतौर पर औद्योगिक मांग।

Silver Price Fall: क्या आगे गिरावट संभव है?

बाज़ार जितनी तेज़ी से ऊपर जाता है, उतनी ही जल्दी उसे ठहरने की ज़रूरत भी पड़ती है। चांदी की मौजूदा रफ्तार को देखकर यही कहा जा सकता है। ₹2.50 लाख प्रति किलो का आंकड़ा पार करते ही अब सवाल मुनाफे का नहीं, संतुलन का है। इस स्तर पर पहुंचते ही बड़े निवेशकों और प्रोफेशनल ट्रेडर्स के बीच यह सोच बनने लगी है कि इतनी तेज़ चढ़ाई के बाद कुछ मुनाफावसूली स्वाभाविक है।

बाज़ार से जुड़े जानकार मानते हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर हालात थोड़े भी बदले—जैसे डॉलर में मजबूती आई, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊपर गई या ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में जोखिम से दूरी बढ़ी—तो चांदी के भाव ₹10,000 से ₹15,000 प्रति किलो तक फिसल सकते हैं। हालांकि इसे गिरावट कहना जल्दबाज़ी होगी। यह एक स्वस्थ करेक्शन माना जाएगा, जो किसी भी मजबूत ट्रेंड का हिस्सा होता है। बड़ी तस्वीर में देखें तो चांदी का रुझान अब भी ऊपर की ओर ही इशारा कर रहा है।

Gold Silver Rate Today: सोना भी मजबूत, लेकिन रफ्तार धीमी

चांदी की तेज़ चाल के बीच सोना भी मजबूती के साथ टिके रहने में कामयाब रहा। सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना कई शहरों में ₹78,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा। फर्क बस इतना है कि जहां चांदी ने अचानक लंबी छलांग लगाई, वहीं सोना अपनी पारंपरिक चाल में, धीरे-धीरे आगे बढ़ता नजर आया। यही वजह है कि इस वक्त सुर्खियों में चांदी है और सोना अपेक्षाकृत शांत दिख रहा है।

निवेशकों के लिए सही रास्ता क्या हो?

चांदी के मौजूदा भाव पर हर निवेशक की स्थिति अलग है, इसलिए फैसला भी एक-सा नहीं हो सकता।

शॉर्ट टर्म निवेशक
जिन लोगों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की थी, उनके लिए अब थोड़ा मुनाफा निकाल लेना समझदारी भरा कदम हो सकता है। पूरी पोज़िशन से बाहर निकलने की बजाय आंशिक मुनाफावसूली जोखिम को कम कर सकती है।

लॉन्ग टर्म निवेशक
ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल को देखते हुए चांदी की लंबी अवधि की कहानी अभी भी मजबूत है। ऐसे निवेशकों के लिए गिरावट डराने वाली नहीं, बल्कि खरीद का मौका बन सकती है।

ज्वैलरी खरीदने वाले
अगर चांदी के गहनों के लिए खरीदारी करनी है, तो मौजूदा भाव पर जल्दबाज़ी सही नहीं होगी। थोड़ा इंतजार करने पर बेहतर कीमत मिलने की संभावना बनी हुई है।

क्या अगला पड़ाव ₹3 लाख होगा?

अब बाजार में चर्चा इसी सवाल की है—क्या चांदी ₹3 लाख प्रति किलो तक जाएगी? कुछ बुलिश एनालिस्ट मानते हैं कि अगर वैश्विक हालात साथ देते रहे और इंडस्ट्रियल डिमांड इसी तरह बनी रही, तो 2026 में यह स्तर भी दूर नहीं। हालांकि, रास्ता आसान नहीं होगा। उतार-चढ़ाव, करेक्शन और मुनाफावसूली इस सफर का हिस्सा रहेंगे।

फिलहाल इतना साफ है कि चांदी ने यह जता दिया है कि यह सिर्फ गहनों की धातु नहीं रही—अब यह बड़े निवेशकों की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।

हालांकि, रास्ता आसान नहीं होगा और बीच-बीच में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

निष्कर्ष

29 दिसंबर 2025 भारतीय कमोडिटी बाजार के इतिहास में दर्ज हो गया है। चांदी का ₹2.50 लाख प्रति किलो के पार जाना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक आर्थिक समीकरणों का संकेत है।

तेजी के पीछे मजबूत वजहें हैं, लेकिन निवेशकों को आंख मूंदकर खरीदारी करने से बचना चाहिए। समझदारी, धैर्य और सही रणनीति ही इस चांदी की चमक से असली फायदा दिला सकती है।

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