Chennai: तमिल सिनेमा और राजनीति—दोनों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले, पूर्व डीएमडीके प्रमुख और लोकप्रिय अभिनेता Captain Vijayakanth की दूसरी पुण्यतिथि पर पूरा तमिलनाडु उन्हें याद करता दिखा। चेन्नई स्थित उनके स्मारक पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। भाजपा समेत कई दलों के वरिष्ठ नेताओं ने Vijayakanth को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। यह सिर्फ एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि उस व्यक्ति को याद करने का दिन था जिसने राजनीति में शालीनता, ईमानदारी और आम आदमी की आवाज़ बनने की कोशिश की। taazanews24x7.com

Captain Vijayakanth: सिर्फ अभिनेता नहीं, एक विचार
Vijayakanth को तमिलनाडु में लोग सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर नहीं जानते थे। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने सिनेमा के ज़रिए सामाजिक अन्याय, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। ‘कैप्टन’ का संबोधन उन्हें यूं ही नहीं मिला—यह उनकी फिल्मों में निभाए गए सशक्त और अनुशासित किरदारों का नतीजा था, जो बाद में उनकी असल ज़िंदगी की पहचान भी बन गया।
उनकी दूसरी पुण्यतिथि पर नेताओं के शब्दों में यही बात बार-बार सुनाई दी कि विजयकांत ने राजनीति को केवल सत्ता का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना।
चेन्नई में श्रद्धांजलि कार्यक्रम, दिखा राजनीतिक एकजुटता का दुर्लभ दृश्य
चेन्नई में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कैप्टन विजयकांत के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। नेताओं ने कहा कि Vijayakanth उन गिने-चुने नेताओं में थे जिनकी स्वीकार्यता दलगत सीमाओं से परे थी।
भाजपा नेताओं ने उन्हें “ईमानदार राजनीति का प्रतीक” बताते हुए कहा कि आज जब राजनीति में अविश्वास बढ़ रहा है, तब Vijayakanth जैसे नेताओं की कमी और अधिक महसूस होती है।
इस मौके पर यह भी देखने को मिला कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के नेता एक मंच पर मौजूद थे—जो आज के दौर में कम ही देखने को मिलता है।
भाजपा नेताओं ने क्या कहा?
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कहा:
- Vijayakanth ने तमिलनाडु की राजनीति में वैकल्पिक राजनीति की शुरुआत की
- उन्होंने सत्ता में रहते हुए भी आम जनता से दूरी नहीं बनाई
- उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है कि राजनीति में ईमानदारी अब भी संभव है
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा,
“कैप्टन विजयकांत ऐसे नेता थे जिन्होंने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम एक ऐसे जननायक को नमन कर रहे हैं, जिसने राजनीति में नई उम्मीद जगाई।”

डीएमडीके की स्थापना और राजनीतिक सफर
वर्ष 2005 में Vijayakanth ने देशीय मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (DMDK) की स्थापना की। उस समय तमिलनाडु की राजनीति दो बड़े ध्रुवों—डीएमके और एआईएडीएमके—के बीच सिमटी हुई थी। ऐसे में डीएमडीके का उभार एक बड़ी राजनीतिक घटना मानी गई।
2006 के विधानसभा चुनाव में भले ही पार्टी को अपेक्षित सफलता न मिली, लेकिन 2011 के चुनाव में डीएमडीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया। यह Vijayakanth की व्यक्तिगत लोकप्रियता और जनता के बीच उनके भरोसे का प्रमाण था।
विपक्ष के नेता के तौर पर विजयकांत की भूमिका
जब Vijayakanth तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता बने, तब उन्होंने कई मौकों पर सरकार से तीखे सवाल पूछे।
भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, किसानों की स्थिति और बेरोज़गारी—ये सभी मुद्दे उनके भाषणों का हिस्सा रहे।
हालांकि उनका राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। स्वास्थ्य समस्याओं और आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों ने उनके प्रभाव को धीरे-धीरे कम किया, लेकिन जनता के दिलों में उनके लिए सम्मान कभी कम नहीं हुआ।
सिनेमा से राजनीति तक: जनता से सीधा रिश्ता
Vijayakanthकी सबसे बड़ी ताकत उनका जनसंपर्क था।
वे जहां भी जाते, लोग उन्हें अपनेपन से मिलते। फिल्मों में उन्होंने पुलिस अधिकारी, सेना के जवान और सामाजिक योद्धा जैसे किरदार निभाए—और राजनीति में भी वही छवि लेकर आए।
उनकी फिल्मों में अक्सर एक संदेश होता था—
अन्याय के खिलाफ खड़े होने का,
कमज़ोर की आवाज़ बनने का,
और सत्ता से सवाल पूछने का।
यही वजह रही कि उनकी राजनीतिक छवि “फिल्मी अभिनेता” से कहीं आगे निकल गई।
पुण्यतिथि पर समर्थकों की भावुक मौजूदगी
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सिर्फ नेता ही नहीं, बड़ी संख्या में विजयकांत के समर्थक भी पहुंचे। कई लोगों की आंखों में आंसू थे।
समर्थकों ने कहा कि
“कैप्टन सिर्फ नेता नहीं थे, वे हमारे परिवार का हिस्सा थे।”
कुछ बुजुर्ग समर्थकों ने बताया कि किस तरह विजयकांत ने निजी स्तर पर उनकी मदद की थी—बिना किसी प्रचार के, बिना किसी दिखावे के।
तमिलनाडु की राजनीति में Vijayakanth की विरासत
आज जब तमिलनाडु की राजनीति फिर से बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है, विजयकांत की विरासत बार-बार चर्चा में आती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
- Vijayakanth ने तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को मजबूत किया
- उन्होंने यह साबित किया कि लोकप्रियता को जनसेवा में बदला जा सकता है
- उनकी राजनीति भावनाओं से जुड़ी थी, लेकिन पूरी तरह खोखली नहीं थी
उनकी कमी इसलिए भी महसूस की जाती है क्योंकि आज की राजनीति में ऐसे नेताओं की संख्या कम होती जा रही है, जो बिना आक्रामकता के भी जनता से जुड़ सकें।
भाजपा और डीएमडीके के संबंधों की झलक
पुण्यतिथि पर भाजपा नेताओं की मौजूदगी को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
यह संकेत देता है कि Vijayakanth को सिर्फ एक पार्टी तक सीमित नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विजयकांत की स्वीकार्यता इतनी व्यापक थी कि हर दल उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखता रहा है। यही वजह है कि उनकी पुण्यतिथि पर अलग-अलग दलों के नेताओं का एक साथ आना किसी आश्चर्य की बात नहीं।
परिवार की ओर से संदेश
Vijayakanth के परिवार की ओर से भी इस मौके पर एक भावुक संदेश जारी किया गया।
परिवार ने कहा कि उन्हें इस बात का गर्व है कि आज भी लोग विजयकांत को याद करते हैं और उनके विचारों को सम्मान देते हैं।
परिवार ने समर्थकों और नेताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि
“कैप्टन की असली ताकत जनता थी, और वही जनता आज भी उनके साथ खड़ी है।”
एक अधूरी राजनीति, लेकिन अमर स्मृति
यह कहना गलत नहीं होगा कि विजयकांत का राजनीतिक सफर कुछ अधूरा रह गया।
अगर स्वास्थ्य ने साथ दिया होता, तो शायद तमिलनाडु की राजनीति की तस्वीर कुछ और होती।
लेकिन इतिहास सिर्फ इस बात से नहीं आंकता कि कौन कितनी दूर तक गया, बल्कि इस बात से भी कि उसने रास्ते में क्या छोड़ा।
विजयकांत अपने पीछे छोड़ गए—
ईमानदारी की मिसाल,
जनता से जुड़ाव की परंपरा,
और राजनीति को इंसानियत से जोड़ने की कोशिश।
निष्कर्ष: कैप्टन विजयकांत, जो हमेशा याद रहेंगे
कैप्टन विजयकांत की दूसरी पुण्यतिथि पर चेन्नई से उठी श्रद्धांजलि की आवाज़ सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी। यह उस नेता के लिए जनता और राजनीति—दोनों का सम्मान था, जिसने अपने तरीके से बदलाव लाने की कोशिश की।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं समेत तमाम लोगों की मौजूदगी यह साबित करती है कि विजयकांत किसी एक पार्टी या विचारधारा तक सीमित नहीं थे। वे एक जननायक थे—और ऐसे जननायक समय के साथ और बड़े होते जाते हैं।
आज भी तमिलनाडु की राजनीति में जब ईमानदारी, सादगी और जनसेवा की बात होती है, तो कैप्टन विजयकांत का नाम अपने आप सामने आ जाता है।
यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।
தமிழ்நாட்டுல #Nationalism நிலைச்சு இருக்குறதுக்கு ஒரு காரணம் நீங்க தான் #Vijayakanth Sir. #MissYouCaptain pic.twitter.com/Dq64Ih0KzJ
— Santhosh Krishnan (@sashkrish18) December 28, 2025