तमिल सिनेमा में जब भी महिला-केंद्रित फिल्मों की बात होती है, तो अक्सर भावनात्मक ड्रामा, सामाजिक संदेश या पारिवारिक संघर्ष सामने आते हैं। लेकिन ‘Revolver Rita’ इन तमाम सीमाओं को तोड़ती है। यह फिल्म न तो उपदेश देती है, न ही किसी एजेंडे का बोझ उठाती है। यह बस एक कहानी कहती है—एक आम लड़की की, जो हालातों के आगे झुकने के बजाय हथियार उठा लेती है। Keerthy Suresh की डार्क कॉमेडी ‘Revolver Rita‘ बीते महीने थिएटर्स में रिलीज हुई थी. सिनेमाघरों में फिल्म ने अच्छा परफॉर्म किया और अब इसके ओटीटी रिलीज का भी ऐलान हो चुका है.taazanews24x7.com
26 दिसंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई ‘Revolver Rita’ सिर्फ एक नई OTT रिलीज नहीं है, बल्कि यह Keerthy Suresh के करियर का अब तक का सबसे साहसी और जोखिम भरा प्रयोग भी है।

OTT पर रिलीज: क्यों ‘Revolver Rita’ थिएटर से ज्यादा नेटफ्लिक्स के लिए बनी फिल्म है
‘रिवॉल्वर रीटा’ जैसी फिल्में अक्सर थिएटर में वो स्पेस नहीं पा पातीं, जिसकी वे हकदार होती हैं। बड़े स्टार्स, फ्रेंचाइजी और मसाला फिल्मों के बीच ऐसी कंटेंट-ड्रिवन कहानियां दब जाती हैं।
OTT प्लेटफॉर्म, खासकर नेटफ्लिक्स, इस फिल्म के लिए इसलिए भी सही जगह है क्योंकि:
- यहां दर्शक कहानी को बिना ब्रेक देख सकता है
- एक्शन और इमोशन को समय मिल पाता है
- महिला-प्रधान फिल्म होने का जोखिम कम हो जाता है
नेटफ्लिक्स पर रिलीज के बाद फिल्म को पैन-इंडिया ऑडियंस मिल रही है, जो शायद थिएटर तक न पहुंच पाती।
कहानी की जड़: पुडुचेरी की एक शांत लड़की और एक गलत हादसा
फिल्म की शुरुआत बेहद सादगी से होती है। रीटा—पुडुचेरी की एक सीधी-सादी लड़की। सीमित सपने, छोटा परिवार और एक ऐसी जिंदगी, जहां कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं।
लेकिन यही शांति तब टूटती है जब:
- एक रात
- एक गलती
- और एक खतरनाक गैंगस्टर की मौत
रीटा का परिवार गलती से एक बड़े अपराधी को मार देता है। यह हत्या न तो प्लान की गई होती है और न ही किसी दुश्मनी का नतीजा।
यहीं से कहानी का असली खेल शुरू होता है।
जब सिस्टम खुद दुश्मन बन जाए
गैंगस्टर की मौत के बाद रीटा का सामना सिर्फ अपराधियों से नहीं होता, बल्कि:
- भ्रष्ट पुलिस
- राजनीतिक दबाव
- और अंडरवर्ल्ड के नेटवर्क
से भी होता है।
फिल्म यहां एक कड़वा सच दिखाती है—कई बार कानून अपराधियों से ज्यादा खतरनाक हो जाता है।
रीटा के पास विकल्प बेहद कम हैं:
- या तो परिवार को सिस्टम के हवाले कर दे
- या फिर खुद सिस्टम के खिलाफ खड़ी हो जाए
वह दूसरा रास्ता चुनती है।
Revolver Rita: एक नाम, जो धीरे-धीरे डर बनता है
फिल्म का सबसे मजबूत पहलू यही है कि रीटा रातों-रात गैंगस्टर नहीं बन जाती।
उसका ट्रांसफॉर्मेशन:
- डर से शुरू होता है
- मजबूरी में बदलता है
- और आत्मविश्वास पर खत्म होता है
जब पहली बार वह बंदूक उठाती है, तो हाथ कांपते हैं। लेकिन जैसे-जैसे हालात बदतर होते जाते हैं, रीटा खुद को मजबूत बनाना सीखती है।
‘Revolver Rita’ सिर्फ नाम नहीं, बल्कि एक पहचान बन जाता है—
एक ऐसी औरत की, जो अब डरने वाली नहीं है।

Keerthy Suresh: अब तक का सबसे अलग और खतरनाक रोल
अगर कोई इस फिल्म को उठाकर ले जाता है, तो वह हैं Keerthy Suresh।
अब तक:
- ‘महानती’ की सवित्री
- सॉफ्ट रोमांटिक किरदार
- संवेदनशील महिला पात्र
करने वाली कीर्ति, यहां बिल्कुल अलग नजर आती हैं।
यहां:
- उनका चेहरा हमेशा सुंदर दिखने के लिए नहीं चमकता
- कपड़े स्टाइल के लिए नहीं, जरूरत के लिए हैं
- आंखों में मासूमियत नहीं, सतर्कता है
एक्शन सीन में कीर्ति सुरेश:
- ओवरएक्ट नहीं करतीं
- हीरोइक पोज नहीं बनातीं
- बस लड़ती हैं—जैसे कोई आम इंसान लड़ेगा
यही उनका अभिनय बेहद विश्वसनीय बनाता है।
महिला-प्रधान, लेकिन ‘फेमिनिज्म’ का नारा नहीं
‘Revolver Rita’ की सबसे बड़ी जीत यही है कि यह:
- फेमिनिज्म को बेचती नहीं
- उसे चिल्लाकर साबित नहीं करती
यह फिल्म बस दिखाती है कि:
जब हालात किसी महिला को दीवार से लगा देते हैं, तो वह क्या कर सकती है।
रीटा:
- परफेक्ट नहीं है
- गलत फैसले लेती है
- हिंसा से भी नहीं बचती
लेकिन यही उसे इंसान बनाता है, प्रतीक नहीं।
डार्क ह्यूमर: गंभीर कहानी में सांस लेने की जगह
फिल्म पूरी तरह भारी नहीं है। कई जगहों पर डार्क कॉमेडी कहानी को संतुलित करती है।
- पुलिस की बेतुकी पूछताछ
- अपराधियों के बीच अजीब बातचीत
- और सिस्टम की विडंबनाएं
ये सब बिना कहानी को हल्का किए, उसे और गहरा बनाते हैं।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले: कोई दिखावा नहीं
निर्देशक ने यह साफ समझा है कि:
- कहानी को ज्यादा स्टाइलिश बनाने की जरूरत नहीं
- किरदार खुद कहानी चला सकते हैं
स्क्रीनप्ले टाइट है:
- हर सीन का मकसद है
- कोई भी ट्रैक फालतू नहीं लगता
- क्लाइमेक्स तक कहानी थकती नहीं
फिल्म का एंड:
- न बहुत आदर्शवादी है
- न ही पूरी तरह खुश
यह असली जिंदगी की तरह अधूरा और सच्चा है।
सिनेमैटोग्राफी और म्यूजिक
पुडुचेरी की लोकेशंस:
- खूबसूरत भी हैं
- और डरावनी भी
कैमरा शहर की गलियों, समुद्र तट और अंधेरे कोनों को कहानी का हिस्सा बना देता है।
बैकग्राउंड स्कोर:
- जरूरत के वक्त तेज
- बाकी समय साइलेंट
जो सीन को बोलने देता है।
सपोर्टिंग कास्ट: कहानी को मजबूती
फिल्म में कोई भी किरदार सिर्फ भराव नहीं है:
- परिवार भावनात्मक जड़ है
- विलेन डर पैदा करते हैं
- पुलिस सिस्टम की सच्चाई दिखाती है
सब कुछ बैलेंस में है।
OTT ऑडियंस के लिए क्यों जरूरी है यह फिल्म
अगर आप:
- एक जैसी थ्रिलर से बोर हो चुके हैं
- महिला लीड वाली दमदार फिल्म देखना चाहते हैं
- कंटेंट को स्टारडम से ऊपर रखते हैं
तो ‘Revolver Rita’ आपके लिए है।
कमियां भी हैं, लेकिन भारी नहीं
फिल्म में:
- कुछ जगह कहानी स्लो लग सकती है
- एक-दो सबप्लॉट और गहरे हो सकते थे
लेकिन ये कमियां फिल्म के असर को कमजोर नहीं करतीं।

निष्कर्ष: Revolver Rita सिर्फ फिल्म नहीं, एक बयान है
‘Revolver Rita’ बताती है कि:
हीरो बनने के लिए सुपरपावर नहीं, हालात काफी होते हैं।
यह Keerthy Suresh के करियर की सबसे साहसी फिल्मों में से एक है और OTT पर यह फिल्म अपनी असली पहचान पा रही है।
अगर इस हफ्ते कुछ अलग, दमदार और सच्चा देखना है, तो
Netflix पर ‘Revolver Rita’ जरूर देखें।
#RevolverRita Trailer 👌🏻🔥
— Ayyappan (@Ayyappan_1504) November 13, 2025
In Cinemas From Nov 28th.
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