Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri Review: धुरंधर के तूफान में क्या टिक पाई कार्तिक- अनन्या की ‘फील गुड’ कहानी?

बॉलीवुड में जब भी कोई रोमांटिक-फैमिली ड्रामा रिलीज़ होता है, तो उससे एक उम्मीद जुड़ जाती है—कि शायद यह फिल्म रिश्तों, इमोशन्स और सादगी के जरिए दिल को छू ले। कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे स्टारर फिल्म Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri भी ठीक उसी उम्मीद के साथ सिनेमाघरों में उतरी। लेकिन सवाल यह है कि जब बॉक्स ऑफिस पर ‘धुरंधर’ जैसी भारी-भरकम फिल्म पहले से तूफान मचा रही हो, तब क्या यह हल्की-फुल्की रोमांटिक कहानी अपना जादू चला पाई?

सोशल मीडिया से लेकर थिएटर के बाहर तक, दर्शकों की राय बंटी हुई है। कोई इसे ‘फील गुड एंटरटेनर’ बता रहा है, तो कोई कह रहा है कि फिल्म में रोमांस और इमोशन दोनों ही नदारद हैं। इस लंबे और गहराई वाले रिव्यू में हम जानेंगे—

  • फिल्म की कहानी कितनी मजबूत है
  • कार्तिक और अनन्या की केमिस्ट्री काम करती है या नहीं
  • आखिर कौन-सी 5 बड़ी खामियां फिल्म को डुबो सकती हैं
  • जनता और क्रिटिक्स का फाइनल फैसला taazanews24x7.com

कहानी: नाम जितनी उलझी, कहानी उतनी ही सीधी

‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ का नाम जितना कन्फ्यूज़िंग लगता है, कहानी उतनी ही सिंपल है। फिल्म एक मिडिल क्लास फैमिली बैकग्राउंड से आने वाले लड़के और लड़की की कहानी है, जो प्यार, परिवार और करियर के बीच संतुलन तलाशते हैं।

कार्तिक आर्यन का किरदार वही जाना-पहचाना ‘दिल का अच्छा, थोड़ा ओवरएक्सप्रेसिव और रोमांटिक लड़का’ है, जबकि अनन्या पांडे एक मॉडर्न सोच रखने वाली लेकिन परिवार से जुड़ी लड़की के रोल में नजर आती हैं। कहानी में रिश्तों की उलझनें, माता-पिता की उम्मीदें, और आज के युवा की कन्फ्यूजन दिखाने की कोशिश की गई है।

लेकिन दिक्कत यहीं से शुरू होती है—फिल्म नई बात कहने की कोशिश तो करती है, मगर उसे गहराई से एक्सप्लोर नहीं कर पाती।

निर्देशन और स्क्रीनप्ले: इमोशन छूते-छूते रह जाते हैं

फिल्म का निर्देशन साफ-सुथरा है, लेकिन सुरक्षित दायरे से बाहर नहीं निकलता। कई सीन ऐसे हैं, जहां दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ सकता था, मगर स्क्रीनप्ले उन्हें जल्दी-जल्दी निपटा देता है।

पहला हाफ फिर भी हल्का-फुल्का और एंटरटेनिंग लगता है, लेकिन सेकेंड हाफ में कहानी दोहराव का शिकार हो जाती है। इमोशनल सीन आते हैं, मगर असर छोड़ने से पहले ही खत्म हो जाते हैं।

यही वजह है कि कई दर्शकों ने थिएटर से निकलते वक्त कहा—

“फिल्म बुरी नहीं है, लेकिन दिल तक पहुंचती भी नहीं।”

कार्तिक आर्यन: चार्म है, लेकिन वही पुराना अंदाज

कार्तिक आर्यन इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी हैं। उनका चार्म, डायलॉग डिलीवरी और बॉडी लैंग्वेज वही है, जिसे उनका फैन बेस पसंद करता है। रोमांटिक सीन में वे सहज लगते हैं और कॉमिक टाइमिंग भी ठीक-ठाक है।

लेकिन सवाल यह भी उठता है—क्या कार्तिक कुछ नया लेकर आए?
ईमानदारी से जवाब दें तो नहीं। यह किरदार उनके पिछले कई रोल्स की याद दिलाता है। अगर आप कार्तिक के फैन हैं, तो आप उन्हें देखकर खुश होंगे, लेकिन अगर आप कुछ नया देखना चाहते हैं, तो थोड़ी निराशा हाथ लग सकती है।

अनन्या पांडे: पहले से बेहतर, लेकिन अभी भी अधूरा सफर

अनन्या पांडे के लिए यह फिल्म एक सुधार की कोशिश जरूर है। उनके एक्सप्रेशंस पहले से बेहतर हैं और कुछ इमोशनल सीन में वे ठीक भी लगती हैं।

लेकिन कई जगहों पर उनका अभिनय सतही लगता है। किरदार की गहराई को पकड़ने में वे पूरी तरह सफल नहीं हो पातीं। रोमांटिक सीन में केमिस्ट्री ठीक है, मगर यादगार नहीं।

यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने लिखा—

“अनन्या ने कोशिश की है, लेकिन रोल उनसे ज्यादा मांग करता था।”

म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर: फिल्म को संभालता हुआ

अगर फिल्म का कोई हिस्सा सबसे ज्यादा काम करता है, तो वह है इसका म्यूजिक। गाने सिचुएशनल हैं, दिल को सुकून देते हैं और कहानी के मूड को सपोर्ट करते हैं।

टाइटल ट्रैक और एक रोमांटिक सॉन्ग सोशल मीडिया पर ट्रेंड भी कर रहा है। बैकग्राउंड स्कोर इमोशनल सीन में असर डालने की कोशिश करता है, लेकिन जब कहानी ही कमजोर हो, तो म्यूजिक भी उसे पूरी तरह नहीं बचा पाता।

धुरंधर’ के सामने क्यों कमजोर पड़ी फिल्म?

जिस हफ्ते ‘तू मेरी मैं तेरा…’ रिलीज़ हुई, उसी दौरान धुरंधर’ जैसी दमदार फिल्म पहले से सिनेमाघरों में थी। जहां ‘धुरंधर’ में दमदार कहानी, इंटेंस ड्रामा और मजबूत किरदार हैं, वहीं यह फिल्म हल्की और सुरक्षित लगती है।

दर्शकों का एक बड़ा वर्ग यही कहता नजर आया—

“अगर फैमिली के साथ हल्का एंटरटेनमेंट चाहिए तो ठीक है, वरना धुरंधर बेहतर ऑप्शन है।”

ये हैं फिल्म की 5 बड़ी खामियां, जो खेल बिगाड़ सकती हैं

1. स्क्रीनप्ले सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरता है
कहानी के पास कहने को बहुत कुछ था, लेकिन ढीली पकड़ वाला स्क्रीनप्ले उसे परदे पर असरदार बनने का मौका ही नहीं देता।

2. इमोशन्स की बात होती है, एहसास नहीं बन पाता
फिल्म कई जगह भावुक होना चाहती है, मगर वे पल दिल में उतरने से पहले ही फिसल जाते हैं।

3. कहानी पहले से देखी-सुनी लगती है
फिल्म ऐसे रास्ते पर चलती है, जहां हर मोड़ जाना-पहचाना है—अगला सीन क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं रहता।

4. सहायक किरदारों के साथ नाइंसाफी
सपोर्टिंग कास्ट मौजूद है, लेकिन उन्हें कहानी में निभाने लायक स्पेस नहीं मिलता, जिससे वे बस नाम भर के किरदार बनकर रह जाते हैं।

5. क्लाइमैक्स जो याद नहीं रहता
जिस अंत से फिल्म को ऊंचाई मिलनी चाहिए थी, वही सबसे फीका साबित होता है—क्रेडिट रोल होते ही असर भी खत्म हो जाता है

जनता का फैसला: शानदार या बेकार?

सोशल मीडिया रिव्यूज़ देखें तो तस्वीर साफ है—

  • कार्तिक-अनन्या के फैंस फिल्म को पसंद कर रहे हैं
  • न्यूट्रल ऑडियंस इसे वन टाइम वॉच बता रही है
  • क्रिटिक्स इसे औसत से नीचे या एवरेज रेटिंग दे रहे हैं

कई लोगों ने लिखा—

“फिल्म बोरिंग नहीं है, लेकिन स्पेशल भी नहीं।”

क्या यह ‘कल्ट क्लासिक’ बन सकती है?

खुद फिल्म के प्रमोशन के दौरान इसे ‘फील गुड लव स्टोरी’ कहा गया था। इसमें कोई शक नहीं कि फिल्म हल्की-फुल्की है और परिवार के साथ देखी जा सकती है। लेकिन कल्ट क्लासिक बनने के लिए जो गहराई, यादगार सीन और मजबूत कहानी चाहिए—वह इसमें नहीं है।

फाइनल वर्डिक्ट: देखें या छोड़ें?

अगर आप—

  • कार्तिक आर्यन के फैन हैं
  • अनन्या पांडे को नए अंदाज में देखना चाहते हैं
  • बिना ज्यादा दिमाग लगाए सिर्फ टाइम पास एंटरटेनमेंट चाहते हैं

तो तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ आपको एक बार देखी जा सकती है।

लेकिन अगर आप—

  • दमदार कहानी
  • गहरे इमोशन्स
  • यादगार सिनेमा

की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।

रेटिंग (औसतन): 2.5/5

धुरंधर के तूफान में यह फिल्म उड़ तो नहीं पाती, लेकिन पूरी तरह डूबती भी नहीं—बस बीच रास्ते अटक जाती है।

निष्कर्ष (Conclusion): धुरंधर के शोर में धीमी पड़ गई ‘तू मेरी मैं तेरा…’ की आवाज

कुल मिलाकर ‘Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri’ एक ऐसी फिल्म है, जो दिल जीतने की कोशिश तो करती है, लेकिन पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाती। कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे का चार्म, म्यूजिक और हल्का-फुल्का टोन इसे एक फील गुड एंटरटेनर बनाते हैं, मगर कमजोर स्क्रीनप्ले, प्रिडिक्टेबल कहानी और इमोशनल गहराई की कमी इसे औसत से ऊपर नहीं जाने देती।

धुरंधर जैसी दमदार फिल्म के सामने यह रोमांटिक-फैमिली ड्रामा और भी फीका लगने लगता है। हां, अगर आप सिर्फ टाइम पास, हल्का रोमांस और स्टार अपील के लिए थिएटर जाना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। लेकिन अगर आप मजबूत कहानी और यादगार इमोशन्स की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो निराशा हाथ लग सकती है।

Leave a Comment