Christmas पर्व 2025: आस्था, प्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाला विश्वव्यापी उत्सव

नई दिल्ली।
दुनिया भर में शांति, प्रेम और मानवता का प्रतीक माना जाने वाला पर्व Christmas इस वर्ष भी पूरे उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार ईसा मसीह के जन्म की याद में मनाया जाता है, लेकिन समय के साथ Christmas केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव के रूप में स्थापित हो चुका है। taazanews24x7.com

भारत जैसे विविधताओं वाले देश में Christmas का उत्सव इस बात का प्रमाण है कि यहां धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर त्योहार मनाने की परंपरा है। चर्चों की घंटियां, रोशनी से जगमगाते शहर से लेकर घरों में सजे Christmas Tree, बच्चों की मुस्कान, बाजारों की रौनक – हर ज,गह Christmas की खुशबू महसूस की जा सकती है और “Merry Christmas” की शुभकामनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि यह पर्व दिलों को जोड़ने की ताकत रखता है।

Christmas का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

Christmas ईसाई धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। मान्यता के अनुसार ईसा मसीह का जन्म बेथलेहम में एक साधारण गोशाला में हुआ था। उनके जन्म के समय तीन ज्योतिषियों द्वारा दिए गए उपहार – सोना, लोबान और गंधरस – उनके दिव्य स्वरूप और मानवता के उद्धारकर्ता होने का संकेत माने जाते हैं। उनके जीवन का मूल संदेश था –
   प्रेम करो, क्षमा करो और सत्य के मार्ग पर चलो।

ईसा मसीह का जीवन प्रेम, करुणा, क्षमा और सत्य के सिद्धांतों पर आधारित था। उन्होंने समाज को यह सिखाया कि हिंसा और घृणा से नहीं, बल्कि प्रेम और सहानुभूति से ही दुनिया को बदला जा सकता है। यही कारण है कि आज भी CHRISTMAS का संदेश हर धर्म और समुदाय के लोगों को प्रेरित करता है।

बाइबिल के अनुसार, ईसा मसीह का जन्म एक साधारण गोशाला में हुआ था, जो यह सिखाता है कि महानता सादगी से जन्म लेती है। यही कारण है कि Christmas का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना दो हजार साल पहले था।

Christmas का इतिहास: कैसे शुरू हुआ यह पर्व?

इतिहासकारों के अनुसार, प्रारंभिक ईसाई समुदाय ने चौथी शताब्दी में पहली बार आधिकारिक रूप से 25 दिसंबर को Christmas मनाना शुरू किया। धीरे-धीरे यह पर्व यूरोप, अमेरिका, एशिया और अफ्रीका तक फैल गया।

समय के साथ Christmas की परंपराओं में कई सांस्कृतिक तत्व जुड़ते गए –

  • Christmas Tree
  • Santa Claus
  • उपहार देने की परंपरा
  • कैरोल गायन

इन सभी ने मिलकर Christmas को एक वैश्विक उत्सव का रूप दे दिया।

Christmas Festival 2025

🇮🇳 भारत में Christmas: विविधता में एकता का उदाहरण

भारत में Christmas केवल ईसाई समुदाय का पर्व नहीं है। दिल्ली, मुंबई, गोवा, केरल, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और पूर्वोत्तर राज्यों में इसे सभी धर्मों के लोग मिलकर मनाते हैं।

 चर्चों में मिडनाइट मास

Christmas की पूर्व संध्या पर चर्चों में होने वाली मिडनाइट मास सबसे खास होती है। हजारों श्रद्धालु मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना करते हैं और देश-दुनिया में शांति की कामना करते हैं।

 कैरोल और सांस्कृतिक कार्यक्रम

स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं में कैरोल सिंगिंग, नाट्य मंचन और संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाटक ईसा मसीह के जीवन और उनके संदेश को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं। स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में बच्चों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं।

Santa Claus: खुशियों और उम्मीदों का प्रतीक

Christmas की बात हो और Santa Claus का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं। Santa Claus बच्चों के लिए सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि उम्मीद, अच्छाई और इनाम का प्रतीक हैं।

माना जाता है कि Santa Claus अच्छे बच्चों को उपहार देते हैं, जिससे बच्चों में अच्छे व्यवहार और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है। मॉल, स्कूल और सोसायटी में Santa Claus के रूप में तैयार लोग बच्चों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरते नजर आते हैं।

Christmas Tree और सजावट का महत्व

Christmas Tree सजाने की परंपरा जर्मनी से शुरू हुई मानी जाती है। हरा पेड़ जीवन और आशा का प्रतीक है, जबकि उस पर लगी रोशनी यह दर्शाती है कि अंधकार में भी प्रकाश की जीत होती है।

आज भारत में भी लोग

  • कृत्रिम Christmas Tree
  • स्टार
  • फेयरी लाइट्स
  • रंगीन गेंदों

से अपने घरों और दुकानों को सजाते हैं। यह सजावट न केवल घरों को सुंदर बनाती है, बल्कि त्योहार का माहौल भी रचती है।

Christmas के पारंपरिक व्यंजन और मिठाइयाँ

Christmas का जश्न स्वादिष्ट व्यंजनों के बिना अधूरा माना जाता है।

  • प्लम केक
  • फ्रूट केक
  • कुकीज़
  • चॉकलेट
  • पारंपरिक गोवन और केरल के व्यंजन

घर-घर में बनाए जाते हैं। लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को मिठाइयाँ बांटकर खुशियां साझा करते हैं।

Christmas 2025

बाजारों में Christmas की रौनक

Christmas का असर बाजारों और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर साफ दिखाई देता है।

  • गिफ्ट आइटम
  • डेकोरेशन सामान
  • कपड़े
  • इलेक्ट्रॉनिक्स

की बिक्री में भारी उछाल आता है। दुकानदारों के अनुसार, Christmas और न्यू ईयर के दौरान व्यापार में 30–40% तक की बढ़ोतरी देखी जाती है।

सामाजिक सेवा और जरूरतमंदों की मदद

Christmas केवल उत्सव का नहीं, बल्कि सेवा का भी पर्व है। कई चर्च और सामाजिक संगठन इस अवसर पर

  • गरीबों को भोजन
  • बच्चों को शिक्षा सामग्री
  • बुजुर्गों को सहायता

प्रदान करते हैं। यह पहल ईसा मसीह के उस संदेश को जीवंत करती है, जिसमें उन्होंने दूसरों की मदद को सबसे बड़ा धर्म बताया।

आधुनिक युग में Christmas का स्वरूप और महत्व

आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में Christmas हमें ठहरकर सोचने का अवसर देता है। यह पर्व सिखाता है कि प्रेम और करुणा से ही समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।

डिजिटल युग में Christmas का जश्न भी बदल रहा है। लोग

  • वीडियो कॉल
  • ई-ग्रीटिंग
  • सोशल मीडिया पोस्ट

के माध्यम से एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। हालांकि, तकनीक के बावजूद Christmas की आत्मा – प्रेम और अपनापन – आज भी बरकरार है।

निष्कर्ष: Christmas – एक पर्व, एक भावना Christmas केवल ईसा मसीह के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानवता, शांति और भाईचारे का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि दुनिया में बदलाव लाने के लिए हमें पहले अपने दिलों में प्रेम और करुणा को जगह देनी होगी और चाहे हमारी आस्था या संस्कृति कोई भी हो, प्रेम की भाषा सबको जोड़ती है

FAQ: 

Christmas क्यों मनाया जाता है?

Christmas ईसा मसीह के जन्म की याद में मनाया जाता है, जो प्रेम, करुणा और मानवता का संदेश देते हैं।

 Christmas 2025 कब है?

Christmas हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है, वर्ष 2025 में भी यह पर्व 25 दिसंबर को ही है।

 भारत में Christmas कैसे मनाया जाता है?

भारत में Christmas चर्चों में प्रार्थना, मिडनाइट मास, Christmas Tree सजावट, केक काटने और सामाजिक सेवा के साथ मनाया जाता है।

 Santa Claus का क्या महत्व है?

Santa Claus बच्चों के लिए खुशियों, उपहार और अच्छे व्यवहार का प्रतीक माने जाते हैं।

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