अंतरराष्ट्रीय डेस्क | विशेष रिपोर्ट 25 दिसंबर 2025:
दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति और सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की मिसाल माने जाने वाले क्षेत्र में उस समय हलचल मच गई, जब CAMBODIA में भगवान विष्णु की एक प्राचीन और पूजनीय प्रतिमा को तोड़े जाने की खबर सामने आई। यह घटना केवल एक मूर्ति के टूटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के टकराव का प्रतीक बन गई है। taazanews24x7.com
वीडियो और तस्वीरों के वायरल होते ही यह मामला CAMBODIA- Thailand सीमा विवाद से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंच गया है। हिंदू और बौद्ध समुदायों में गहरी नाराज़गी देखी जा रही है, वहीं कई देशों ने इसे धार्मिक भावनाओं के अपमान के रूप में देखा रहे है।
घटना क्या है: कैसे टूटी भगवान विष्णु की प्रतिमा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह प्रतिमा CAMBODIA के एक सीमा क्षेत्र में स्थित थी, जिसे स्थानीय लोग वर्षों से आस्था और श्रद्धा के प्रतीक के रूप में देखते थे। बताया जा रहा है कि यह प्रतिमा भगवान विष्णु के पालनकर्ता और संरक्षक स्वरूप को दर्शाती थी और इसका ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व भी था।
घटना के दिन भारी मशीनरी के साथ सुरक्षा बल वहां पहुंचे और कुछ ही समय में प्रतिमा को गिरा दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी प्रकार की सार्वजनिक सूचना, धार्मिक संगठनों से संवाद या सांस्कृतिक संरक्षण एजेंसियों से अनुमति नहीं ली गई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रतिमा 2014 में स्थापित की गई थी और यह विवादित सीमा क्षेत्र के नज़दीक, लगभग 100 मीटर के भीतर CAMBODIA क्षेत्र में स्थित थी।
इस दृश्य के वायरल होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और भी बढ़ गया है, साथ ही पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।
CAMBODIA का रुख: “यह हमारी संस्कृति पर हमला है”
CAMBODIA अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को सीधी सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था पर चोट बताया है। CAMBODIA सरकार का कहना है कि जिस स्थान पर यह प्रतिमा स्थित थी, वह CAMBODIA के अधिकार क्षेत्र में आता है, और वहां की सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।
CAMBODIA के आधुनिक इतिहास में सांस्कृतिक विरासत की रक्षा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, और इस प्रकार की धार्मिक प्रतिमा का विनाश सीधे-सीधे गर्त में गिरने जैसा है।
CAMBODIA के कई इतिहासकारों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों का कहना है कि
“यह प्रतिमा केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं थी, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू-बौद्ध साझा विरासत का प्रमाण थी।” स्थानीय लोगों में डर और गुस्सा दोनों है। कई गांवों में शांति प्रार्थनाएं आयोजित की गईं और सरकार से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की मांग की गई।

Thailand की सफाई और विवाद
वहीं दूसरी ओर, थाईलैंड की ओर से यह कहा गया कि यह कदम सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से जुड़ा हुआ था। थाई अधिकारियों का दावा है कि जिस स्थान पर प्रतिमा थी, वह विवादित सीमा क्षेत्र में आता है और वहां किसी स्थायी संरचना की अनुमति नहीं थी।
हालांकि थाई सरकार ने यह भी कहा कि
“हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना हमारा उद्देश्य नहीं था।”
लेकिन आलोचकों का कहना है कि यदि उद्देश्य सुरक्षा था, तो संवाद और वैकल्पिक समाधान भी अपनाए जा सकते थे।
भारत और वैश्विक हिंदू समाज की प्रतिक्रिया
भगवान विष्णु हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। भारत सहित कई देशों में इस घटना को लेकर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया गया।
धार्मिक संगठनों और सांस्कृतिक मंचों ने कहा कि
“आधुनिक राजनीति में धार्मिक प्रतीकों को बलि चढ़ाना सबसे खतरनाक प्रवृत्ति है।”
सोशल मीडिया पर #SaveHeritage, #VishnuStatue और #RespectFaith जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई विद्वानों ने इसे सभ्यताओं के टकराव की बजाय संवाद की विफलता बताया।
दोनों देशों के बीच सीमा संघर्ष — क्या है मुख्य मुद्दा?
Thailand और CAMBODIA के बीच यह संघर्ष नए नहीं है। वे दशकों से सीमा की रेखा को लेकर विवाद में लगे हुए हैं, और प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास के भूभाग पर नियंत्रण विवादित रहा है।
हाल ही में जारी रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों के बीच भारी संघर्ष जारी है, जिसमें सैनिकों की तैनाती और सीमा इलाकों में झड़पें बढ़ चुकी हैं।
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को विवाद के बीच रखा जाना तनाव को और बढ़ा सकता है, और इससे न केवल सीमा विवाद बढ़ेगा, बल्कि विश्व समुदाय के धार्मिक भावनाएँ भी आहत होंगी।
भगवान विष्णु और CAMBODIA का ऐतिहासिक संबंध
यह समझना जरूरी है कि CAMBODIA में भगवान विष्णु की उपस्थिति कोई नई बात नहीं है। अंगकोर वाट, जो दुनिया के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है, मूल रूप से भगवान विष्णु को समर्पित था।
CAMBODIA की प्राचीन खमेर सभ्यता में हिंदू धर्म का गहरा प्रभाव रहा है। विष्णु, शिव और ब्रह्मा की मूर्तियां आज भी वहां के इतिहास और वास्तुकला में देखी जा सकती हैं।
इस संदर्भ में किसी विष्णु प्रतिमा का टूटना केवल स्थानीय घटना नहीं, बल्कि पूरे एशियाई सांस्कृतिक इतिहास पर प्रश्नचिह्न है।
सीमा विवाद और धार्मिक प्रतीक
विशेषज्ञ मानते हैं कि CAMBODIA और Thailand के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है। कई बार मंदिर, मूर्तियां और ऐतिहासिक स्थल राजनीतिक दावों का हिस्सा बन जाते हैं।
समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब
- धार्मिक प्रतीकों को रणनीतिक उपकरण बनाया जाए
- या सुरक्षा के नाम पर सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाया जाए
यही कारण है कि यह मामला केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा।
अंतरराष्ट्रीय कानून और सांस्कृतिक संरक्षण
संयुक्त राष्ट्र और Unesco जैसे संगठन बार-बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि
“संघर्ष क्षेत्रों में भी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों की रक्षा अनिवार्य है।”
इस घटना के बाद कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने मांग की है कि
- घटना की स्वतंत्र जांच हो
- जिम्मेदारी तय की जाए
- और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं

मीडिया, सोशल मीडिया और जनभावना
आज के Digital युग में, किसी भी घटना का प्रभाव सीमाओं में नहीं बंधा रहता। भगवान विष्णु की प्रतिमा टूटने का वीडियो कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच गया।
मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि
“अगर समय रहते सही संवाद नहीं हुआ, तो यह मामला धार्मिक ध्रुवीकरण की ओर भी जा सकता है।”
इसी कारण कई जिम्मेदार मंचों ने शांति और संयम की अपील की है।
आगे क्या: समाधान का रास्ता
विशेषज्ञों के अनुसार समाधान के लिए जरूरी है कि
- दोनों देश बातचीत के जरिए स्थिति स्पष्ट करें
- सांस्कृतिक विरासत को राजनीतिक विवाद से अलग रखा जाए
- धार्मिक संगठनों और स्थानीय समुदायों को विश्वास में लिया जाए
कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि क्षेत्रीय मध्यस्थता और अंतरराष्ट्रीय निगरानी से इस तरह के विवादों को रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक धार्मिक प्रतिमा के ध्वस्त होने का नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक ऐतिहासिक, राजनीतिक और धार्मिक परिप्रेक्ष्य में देखी जाने वाली घटना है।
भगवान विष्णु की प्रतिमा का विनाश, उसकी स्थापना के कारण और दोनों देशों की अपेक्षाएँ—यह सब मिलकर एक ऐसी जटिल स्थिति बना रहे हैं, जिसे केवल संवाद, सम्मान और समझ के साथ सुलझाया जा सकता है।
CAMBODIA में भगवान विष्णु की प्रतिमा का ध्वंस केवल पत्थर के टूटने की घटना नहीं है, यह
- आस्था पर आघात
- इतिहास की उपेक्षा
- और संवाद की कमी का परिणाम है
दक्षिण-पूर्व एशिया की पहचान हमेशा से सांस्कृतिक सह-अस्तित्व रही है। ऐसे में यह घटना एक चेतावनी है कि
धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान ही स्थायी शांति का आधार है।
आगे की घटनाएँ यह तय करेंगी कि क्षेत्रीय शांति और धार्मिक-संस्कृतिक सम्मान किस दिशा में आगे बढ़ता है। साथ ही, आने वाला समय बताएगा कि क्या यह विवाद संवाद से सुलझेगा, या फिर यह क्षेत्रीय तनाव को और गहरा करेगा।

Even Thailand is now showing Red eyes to us.
— Dr Nimo Yadav 2.0 (@DrNimoYadav) December 22, 2025
Thai army has bulldozed statue of Lord Hanuman in captured area of Cambodia.
India govt should retaliate to save Sanatana dharma.
Please share this video as much as you can if you are a patriot and love sanatana dharma pic.twitter.com/VNvhuI5bct