नई दिल्ली:भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। केंद्र सरकार ने तीन नई Airlines—SANKH AIR, AL HIND AIRऔर FLYEXPRESS को परिचालन की मंजूरी देकर देश के आसमान में प्रतिस्पर्धा की नई इबारत लिख दी है। यह फैसला केवल नई कंपनियों को उड़ान की अनुमति भर नहीं है, बल्कि उस लंबे समय से चले आ रहे एकछत्र वर्चस्व को तोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है, जिसमें बाजार मुख्य रूप से इंडिगो और इंडिगो के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ था। taazanews24x7.com
नागरिक उड्डयन मंत्रालय का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में यह सेक्टर न केवल घरेलू बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई ऊंचाइयों को छुएगा। ऐसे में नई एयरलाइंस की एंट्री से यात्रियों को सस्ता सफर, बेहतर सेवाएं और ज्यादा विकल्प मिलने की पूरी उम्मीद है।

भारतीय विमानन बाजार: तेजी, विस्तार और संभावनाएं
पिछले दस वर्षों में भारत का विमानन क्षेत्र अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ा है। जहां एक समय हवाई यात्रा को अमीरों का साधन माना जाता था, वहीं आज टियर-2 और टियर-3 शहरों के लोग भी फ्लाइट से सफर करना सामान्य बात मानने लगे हैं। इसके पीछे कई वजहें हैं—
- सरकार की उड़ान (UDAN) योजना
- नए एयरपोर्ट्स का निर्माण
- क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर जोर
- डिजिटल टिकटिंग और किफायती किराए
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या हर साल नए रिकॉर्ड बना रही है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक और घरेलू कारोबारी दोनों इस सेक्टर में संभावनाएं देख रहे हैं।
तीन नईAirlines: कौन, कहां और कैसे?
1. SANKH AIR: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर फोकस
SANKH AIR को एक ऐसी Airline के रूप में देखा जा रहा है, जो छोटे शहरों और उभरते औद्योगिक केंद्रों को सीधे मेट्रो शहरों से जोड़ेगी। जानकारों का मानना है कि यह Airline हाइब्रिड मॉडल अपनाएगी—जहां कुछ रूट्स पर फुल-सर्विस और कुछ पर लो-कॉस्ट मॉडल देखने को मिल सकता है।
SANKH AIR का लक्ष्य उन रूट्स पर उड़ान भरना है, जहां अब तक सीमित विकल्प मौजूद थे। इससे न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
2. अल हिंद एयर: खाड़ी कनेक्शन की तैयारी
AL HIND AIRका नाम खास तौर पर केरल और दक्षिण भारत में चर्चा का विषय बना हुआ है। अल हिंद ग्रुप पहले से ही ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर में सक्रिय रहा है। अब Airline कारोबार में उतरकर यह समूह घरेलू के साथ-साथ भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की भी योजना बना रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि AL HIND AIRखाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों के लिए आने वाले समय में बड़ा विकल्प बन सकती है। शुरुआत भले घरेलू उड़ानों से हो, लेकिन इसका विजन लंबी दूरी का बताया जा रहा है।
3. FLYEXPRESS: बजट यात्रियों की उम्मीद
FLYEXPRESS (FlyExpress) का नाम ही इसके मॉडल की झलक देता है। यह Airline मुख्य रूप से लो-कॉस्ट कैरियर के रूप में बाजार में उतरने की तैयारी में है। इसका सीधा मतलब है—कम किराया, ज्यादा सीटें और तेज टर्नअराउंड टाइम।
FLYEXPRESS की एंट्री से खास तौर पर उन यात्रियों को फायदा मिलेगा, जो ट्रेन और बस के मुकाबले थोड़ा महंगा लेकिन तेज विकल्प तलाशते हैं।

क्यों जरूरी थी नई Airlines?
भारतीय विमानन बाजार में लंबे समय से खल रही थी यह कमी
अगर पिछले कुछ सालों के भारतीय विमानन बाजार पर नजर डालें, तो एक बात साफ दिखती है—मैदान में मुकाबला कमजोर पड़ता जा रहा था। इंडिगो की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती गई और एयर इंडिया के टाटा समूह में जाने के बाद बाजार और ज्यादा कुछ चुनिंदा कंपनियों के इर्द-गिर्द सिमट गया।
बड़ी Airlines का मजबूत होना किसी भी सेक्टर के लिए गलत नहीं होता, लेकिन जब विकल्प घटने लगते हैं, तो उसकी कीमत आखिरकार यात्रियों को चुकानी पड़ती है। किराए बढ़ते हैं, कुछ रूट्स पर उड़ानें सीमित हो जाती हैं और सेवा सुधारने का दबाव भी कम हो जाता है।
यही वजह है कि इंडस्ट्री के जानकार काफी समय से कह रहे थे कि नई एयरलाइंस की एंट्री अब जरूरी हो चुकी है। SANKH AIR, AL HIND AIRऔर FLYEXPRESS की मंजूरी को इसी संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
इन नई कंपनियों के आने से:
- टिकट के दाम पर संतुलन बनेगा
- यात्रियों के पास ज्यादा विकल्प होंगे
- कई ऐसे रूट्स पर उड़ानें शुरू होंगी, जो अब तक एयरलाइंस की प्राथमिकता में नहीं थे
सरकार की सोच साफ: बाजार खुलेगा, यात्री जीतेगा
मोदी सरकार की नागरिक उड्डयन नीति का रुख शुरू से ही साफ रहा है—प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो सिस्टम अपने आप सुधरेगा।
पिछले कुछ वर्षों में मंत्रालय ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान किया, नियमों को सरल बनाया और नए खिलाड़ियों के लिए रास्ता खोला।
तीन नई Airlines को NOC मिलना इसी नीति का व्यावहारिक नतीजा है। सरकार का मानना है कि जब बाजार में ज्यादा कंपनियां होंगी, तो किराए को लेकर मनमानी की गुंजाइश कम होगी और Airlines को यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देनी पड़ेगी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक:
- किराए अपने आप प्रतिस्पर्धी स्तर पर आएंगे
- सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा
- सेक्टर में नई सोच और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा
उड़ान योजना को मिलेगी असली रफ्तार
उड़ान योजना को शुरू हुए काफी वक्त हो चुका है, लेकिन हकीकत यह है कि कई छोटे एयरपोर्ट आज भी पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं हो पा रहे हैं। रनवे है, टर्मिनल है, लेकिन फ्लाइट्स गिनी-चुनी हैं।
नई Airlines के आने से इस तस्वीर के बदलने की उम्मीद है। ये कंपनियां उन रूट्स पर भी नजर डाल सकती हैं, जहां बड़ी एयरलाइंस जाना फायदे का सौदा नहीं मानतीं।
इसका सीधा असर पड़ेगा:
- छोटे शहरों में पर्यटन बढ़ेगा
- व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी
- स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के मौके पैदा होंगे
आम यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?
सबसे बड़ा सवाल यही है—यात्री को क्या मिलेगा?
जवाब सीधा है: राहत।
किराए को लेकर मुकाबला बढ़ेगा, जिससे हवाई सफर पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती हो सकता है। इसके अलावा यात्रियों को फ्लाइट टाइमिंग, एयरलाइन और सर्विस के ज्यादा विकल्प मिलेंगे।
अब Airlines को:
- समय की पाबंदी दिखानी होगी
- कस्टमर सपोर्ट मजबूत करना होगा
- सेवा में लापरवाही की गुंजाइश कम होगी
रोजगार के लिहाज से भी अहम कदम
तीन नई Airlines का मतलब सिर्फ नई उड़ानें नहीं, बल्कि हजारों नई नौकरियां भी हैं।
पायलट, केबिन क्रू, इंजीनियर, ग्राउंड स्टाफ—हर स्तर पर मांग बढ़ेगी।
इसके साथ ही होटल, टैक्सी, ट्रैवल एजेंसी और टूरिज्म सेक्टर को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिलेगा, खासकर छोटे शहरों में।
इंडिगो और एयर इंडिया के लिए बढ़ेगी चुनौती
नई Airlines के आने से इंडिगो और एयर इंडिया के लिए चुनौती जरूर बढ़ेगी, लेकिन यह चुनौती बाजार के लिए सेहतमंद मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बड़ी कंपनियां भी अपनी सेवाओं और रणनीतियों को और बेहतर करेंगी।
आने वाले समय में:
- ज्यादा ऑफर्स और छूट देखने को मिल सकती है
- नए रूट्स पर उड़ानें शुरू होंगी
- फ्लीट विस्तार की रफ्तार तेज होगी
चुनौतियां अपनी जगह, लेकिन रास्ता खुला है
एविएशन सेक्टर आसान नहीं है। ईंधन की कीमतें, विमान लीजिंग की लागत और अनुभवी स्टाफ की कमी जैसी चुनौतियां नई Airlines के सामने भी रहेंगी।
लेकिन अगर योजना मजबूत रही और सरकार का सहयोग मिलता रहा, तो ये कंपनियां लंबे समय तक टिक सकती हैं।

निष्कर्ष
SANKH AIR, AL HIND AIRऔर FLYEXPRESS को मिली मंजूरी भारतीय विमानन बाजार के लिए एक जरूरी और समय पर लिया गया फैसला है।
यह कदम न सिर्फ इंडिगो-एयर इंडिया की DUOPOLY को चुनौती देगा, बल्कि हवाई सफर को आम आदमी के और करीब लाएगा।
अब भारतीय आसमान में मुकाबला तेज होगा—
और इस मुकाबले का सबसे बड़ा फायदा मिलेगा देश के यात्रियों को।
नई एयरलाइंस के लिए खुला रास्ता
— Zee Business (@ZeeBusiness) December 24, 2025
विमानन मंत्रालय से शंख एयर को NOC मिला
AI अल हिन्द और फ्लाई एक्सप्रेस को भी मिली मंजूरी
जानिए पूरी खबर संवाददाता @pandeyambarish से #AviationNews #NewAirlines #ShankhAir #AIAlHind @AnitaPandeyy pic.twitter.com/1Q0LbfPNAE