नई दिल्ली, 10 दिसंबर 2025 — संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार को तब राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा गर्म हो उठा, जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान विपक्ष को एक के बाद एक करारे जवाब दिए। अमित शाह ने पहली बार सरकार की घुसपैठियों के खिलाफ नई ‘3D पॉलिसी’—पहचानो, हटाओ और देश से बाहर करो—(Detect, Delete, Deport) का विस्तृत खाका पेश किया।
इसके साथ ही उन्होंने EVM को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी राहुल गांधी और विपक्ष पर बड़ा पलटवार किया। लोकसभा में लगातार हो रही टोकाटोकी से नाराज अमित शाह ने राहुल गांधी को चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा—
“आपकी मुंसिफ़गीरी से सदन नहीं चलेगा। मैं तय करूंगा कि मुझे क्या बोलना है।”taazanews24x7.com
पूरे सत्र में अमित शाह ने ममता बनर्जी, कांग्रेस और UPA सरकारों को घुसपैठ और वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार ठहराया। राजनीतिक माहौल इतना गर्म था कि कई बार सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने खड़े दिखाई दिए।

अमित शाह की 3D पॉलिसी: घुसपैठियों पर सबसे बड़ा ऐलान
अमित शाह ने दावा किया कि देश की सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और लोकतंत्र की पवित्रता को बचाने के लिए अवैध घुसपैठियों पर कड़ा एक्शन लेना जरूरी है। इसी के तहत सरकार की 3D पॉलिसी बनाई गई है।
1. D – Detect (पहचानो)
शाह ने बताया कि घुसपैठ की समस्या पिछले 40 वर्षों से है और इससे कई राज्यों का जनसांख्यिकी ढांचा बिगड़ा है।
उन्होंने कहा:
“देश में जो भी अवैध रूप से आए हैं, उनके पैटर्न, डॉक्यूमेंट, निवास रिकॉर्ड और गतिविधियों का डेटा तैयार किया जा रहा है। वे कितने हैं, कहां रहते हैं—अब सबकी पहचान होगी।”
इस चरण में NPR, आधार, राज्य पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के डेटा को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा।
2. D – Delete (हटाओ)
यह 3D पॉलिसी का सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील हिस्सा है।
शाह ने कहा:
“वोटर लिस्ट से घुसपैठियों के नाम हटाए जाएंगे। यह लोकतंत्र की शुद्धता का सवाल है। घुसपैठिए तय नहीं करेंगे कि भारत का PM या CM कौन होगा।”
उनके इस बयान ने सदन में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की और विपक्ष के कई नेता हंगामा करने लगे।
3. D – Deport (देश से बाहर करो)
अमित शाह ने कहा कि अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के लिए राजनयिक और कानूनी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कई देशों के साथ नए समझौते होंगे।
उन्होंने साफ कहा—
“भारत किसी का धर्मशाला नहीं है, जहाँ कोई भी आए और बस जाए।”
लोकसभा में गरमा-गरमी: अमित शाह बनाम राहुल गांधी
बहस के दौरान राहुल गांधी बार-बार शाह की बात में हस्तक्षेप कर रहे थे। इस पर गृहमंत्री ने तीखी नाराज़गी जताई।
उन्होंने कहा:
“राहुल जी, आप अपनी मुंसिफ़गीरी मत दिखाइए। यह अदालत नहीं है कि आप तय करें कौन कैसे बोलेगा। संसद के नियम हैं और उन नियमों से ही सदन चलेगा।”
यह टिप्पणी सुनते ही कांग्रेस MPs खड़े होकर विरोध करने लगे। भाजपा सांसद तालियां थपथपाने लगे। सदन कुछ मिनटों के लिए बेहद शोरगुल वाला हो गया।
राहुल गांधी का डिबेट चैलेंज—अमित शाह का पलटवार
राहुल गांधी ने बीच में टोकते हुए कहा—
“अगर आपमें हिम्मत है तो मेरे साथ खुली बहस कीजिए।”
इस पर शाह ने मुस्कुराते हुए कहा:
“मैं यहीं खड़ा हूं और पूरी बहस कर रहा हूं। मुझे क्या बोलना है, ये मैं तय करूंगा। विपक्ष के इशारों पर नहीं चलूंगा।”
यह बयान पूरे दिन सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता रहा।

EVM पर बड़ा बयान: 2004 में भी EVM थीं, तब कांग्रेस जीती थी
EVM को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इस पर शाह ने कहा कि विपक्ष हारते ही मशीन पर सवाल उठाता है।
उन्होंने कहा—
“पहली बार EVM का पूर्ण उपयोग 2004 में हुआ था। तब कांग्रेस की सरकार बनी थी। तब मशीन ठीक थी और आज गलत कैसे हो गई? चिन्हित हार को बचाने के लिए EVM को दोष देना गलत है।”
यह टिप्पणी कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से असहज थी, क्योंकि यह तथ्य विपक्ष की पूरी दलील को कमजोर कर देता है।
ममता बनर्जी पर सख्त हमला: “घुसपैठियों को बचाओगी तो बिहार जैसा सफाया तय”
अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ का सबसे बड़ा असर पश्चिम बंगाल पर पड़ा है।
उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा:
“अगर ममता जी घुसपैठियों को संरक्षण देती रहीं, तो उनके राज्य में भी वही हाल होगा जो बिहार में हुआ है। घुसपैठियों ने वहां की राजनीति और समाजिक संरचना को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।”
उन्होंने दावा किया कि बंगाल में नए-नए वोटर IDs और फर्जी लिस्टिंग का नेटवर्क सक्रिय है, जिसे राष्ट्रपति शासन के समय या केंद्र की कड़ी निगरानी में ही रोका जा सकता है।
कांग्रेस पर सबसे बड़ा हमला: वोट बैंक के लिए देश को खतरे में डाला
शाह ने कहा कि घुसपैठ की समस्या सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि वोट बैंक राजनीति का सीधे-सीधे परिणाम है।
उन्होंने कहा—
“कांग्रेस ने दशकों तक तुष्टिकरण की राजनीति की। अवैध प्रवासियों को राशन कार्ड, आधार, स्कूलों में दाखिला और वोटर कार्ड दिलाए गए। यह देशद्रोह जैसा अपराध है।”
उन्होंने दावा किया कि इन कारणों से कई सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या का संतुलन बदल गया, जिसका असर स्थानीय रोजगार, कृषि और कानून-व्यवस्था पर पड़ा।

चुनाव सुधारों पर 70 मिनट का सबसे लंबा बयान
अमित शाह का भाषण कुल 70 मिनट चला, जिसमें उन्होंने चुनाव सुधारों पर ऐतिहासिक बदलावों का खाका पेश किया:
वोटर लिस्ट की राष्ट्रीय डिजिटल सफाई
फर्जी वोटरों की पहचान
आधार-मतदाता पहचान लिंकिंग को मजबूती
सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सर्वे
नई निष्पक्ष पोलिंग टेक्नोलॉजी
बूथ कैप्चरिंग रोकने के लिए स्मार्ट निगरानी
उन्होंने कहा:
“चुनाव परिणामों को किसी भी कीमत पर शुचिता और पारदर्शिता चाहिए। यही मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद है।”
घुसपैठियों की संख्या पर बड़ा खुलासा—लोकसभा में डेटा पेश
भाषण के बीच शाह ने यह भी कहा कि:
- पूर्वोत्तर राज्यों में 11% जनसंख्या परिवर्तन घुसपैठ के कारण
- बंगाल के 6 जिलों में जनसंख्या तेजी से बदल रही है
- फर्जी राशन कार्ड 23 लाख से अधिक
- डुप्लीकेट वोटर ID 9 लाख पाए गए
- सीमा सुरक्षा बल ने 2024-25 में 78,000 से ज्यादा अवैध प्रवासियों को पकड़ा
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ “विकास बनाम राजनीति” का नहीं, बल्कि “राष्ट्र सुरक्षा” का है।
लोकसभा में विपक्ष का पलटवार, लेकिन शाह का रवैया सबसे दृढ़
कांग्रेस, टीएमसी और लेफ्ट ने कहा कि यह सब “भय पैदा करने वाली राजनीति” है।
लेकिन शाह अपने रुख पर अड़े रहे।
उन्होंने कहा—
“अगर घुसपैठ रोकना डर फैलाना है, तो हां, मैं डर फैलाता हूं। क्योंकि मेरा डर देश की सुरक्षा के लिए है, न कि वोट बैंक के लिए।”
उनका यह बयान भाजपा सांसदों द्वारा तालियों से स्वागत किया गया।
राजनीतिक विश्लेषण: शाह के भाषण के 7 बड़े संकेत
1. 2026 के बड़े चुनावों की जमीन तैयार
BJP राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम वोट बैंक का नैरेटिव मजबूत कर रही है।
2. बंगाल में TMC पर सीधा हमला
ममता बनर्जी पर शाह का बयान चुनावी संकेतों से भरा हुआ है।
3. राहुल गांधी पर व्यक्तिगत-स्तर पर जवाब
राहुल के बयान, चुनौती और राजनीति पर स्पष्ट प्रहार।
4. विपक्ष की एकता को टूटता दिखाना
EVM पर विपक्ष की कमजोरी उजागर।
5. CAA-NRC की बहस दोबारा गर्म होगी
घुसपैठ पर कड़ा रुख उसी दिशा में इशारा है।
6. सरकार की नई वोटर लिस्ट नीति
राष्ट्रीय स्तर पर वोटर लिस्ट सुधार बड़े पैमाने पर होंगे।
7. सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका बढ़ेगी
घुसपैठ नियंत्रण अब चुनावी मुद्दा से अधिक राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय होगा।

निष्कर्ष: 2025 की सबसे राजनीतिक गर्म टिप्पणी—“घुसपैठिए PM-CM तय नहीं करेंगे”
अमित शाह का यह बयान आने वाले कई महीनों की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है—
“घुसपैठिए तय नहीं करेंगे कि देश का प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री कौन बनेगा।”
यह सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि 2026 के चुनावों का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनता हुआ दिखाई दे रहा है।
संसद में उठी यह बहस आने वाले समय में बंगाल, बिहार, असम, दिल्ली और उत्तर भारत की राजनीति को गहराई से प्रभावित करेगी।
सरकार दृढ़ है, विपक्ष आक्रामक है—लेकिन देश देख रहा है कि घुसपैठ और चुनाव सुधार भारत की राजनीति का नया युद्धक्षेत्र बन चुका है।