Dhurandhar Review: कराची की गैंगस्टरबाजी, आतंकवाद की जड़ें और इंडियन मिशन—आदित्य धर ने रचा बड़ा सिनेमाई तूफान, रणवीर सिंह का बेजोड़ कमाल

बॉलीवुड में स्पाई-थ्रिलर एक ऐसा जॉनर है, जिसमें हर फिल्म अपने साथ एक उम्मीद लेकर आती है। उम्मीद—कि यह कहानी कुछ नया दिखाएगी, आतंकवाद की अंधेरी दुनिया की परतें खोलेगी, और एक जासूस की उस असली दुनिया को सामने लाएगी, जिसकी झलक आम लोग कभी नहीं देख पाते। उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक के बाद निर्देशक आदित्य धर ने एक बार फिर इसी उम्मीद को चुनौती देने वाला सिनेमाई ब्रह्मास्त्र पेश किया है—‘Dhurandhar’

रणवीर सिंह की दमदार अदाकारी, कराची के अंडरवर्ल्ड का अंधेरा, भारतीय इंटेलिजेंस की रणनीतियाँ, पाकिस्तान की राजनीतिक-आतंकी सांठगांठ, और स्क्रीन पर फैला रॉ थ्रिल—धुरंधर को 2025 की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में बदल देता है। taazanews24x7.com

ट्रेलर ने ही बता दिया था कि यह फिल्म ‘टिपिकल’ देशभक्ति का झंडा लहराने वाली नहीं है। यह फिल्म खुफिया दुनिया की रियलिस्टिक, रिस्की, गंदी और खतरनाक सच्चाई को दिखाने वाली है। और पूरी फिल्म देखने के बाद यह बात साफ हो जाती है कि आदित्य धर ने इस बार सिर्फ एक फिल्म नहीं बनाई—एक पूरा इंटेलिजेंस यूनिवर्स खड़ा कर दिया है।

इस विस्तृत रिव्यू में हम फिल्म के हर पक्ष—कहानी, अभिनय, निर्देशन, सिनेमेटोग्राफी, रिसर्च, एक्शन, रियलिज़्म, कमजोरियां और स्पेशल हाईलाइट्स—का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।

कहानी: आतंकवाद की जड़ों तक जाने वाला स्पाई-थ्रिलर ब्रह्मांड

फिल्म की शुरुआत भारत में बढ़ते लगातार आतंकी हमलों से होती है।
पार्लियामेंट अटैक जैसे हमले, प्लेन हाईजैक, पब्लिक प्लेसेज़ में बॉम्ब ब्लास्ट—इसके पीछे एक सिंगल सोर्स की थ्योरी उभरती है।

यहीं प्रवेश होता है—

IB चीफ अजय सान्याल (अक्षय खन्ना)

जो इस पूरे खतरनाक जाल को तोड़ने के लिए एक ‘अनकन्वेंशनल एजेंट’ की तलाश करते हैं।

यहां से कहानी की धड़कन बनता है—

हमजा (रणवीर सिंह)

एक अंडरकवर ऑपरेटिव।
वह दुश्मन के गढ़ कराची के ल्यारी इलाके में जाकर गैंगस्टर की तरह अपनी पहचान बनाता है और ISI–गैंग–आतंकी मॉड्यूल की जड़ तक जाने का मिशन उठाता है।

कहानी सिर्फ आतंकवाद के अटैक नहीं दिखाती, बल्कि यह दिखाती है—
 पैसा कहां से आता है
 हथियार कैसे पहुंचते हैं
 युवा कैसे ब्रेनवॉश किए जाते हैं
 अंडरवर्ल्ड और पाकिस्तान की राजनीति कैसे हाथ मिलाती है
एक भारतीय जासूस कैसे एक झूठी पहचान में जीता है

कहानी जितनी गहरी है, उतनी ही रिसर्च-ड्रिवन भी है।
आदित्य धर ने आतंकवाद का एक ‘सोशल-साइकोलॉजिकल मैप’ बनाकर दर्शकों के सामने रख दिया है।

फर्स्ट हाफ: शानदार बिल्ड-अप, दिल धड़काने वाला ग्राउंडवर्क

फिल्म का पहला हिस्सा मास्टरक्लास है।
यहां आदित्य धर दुनिया सेट करते हैं, किरदार गढ़ते हैं, नेटवर्क दिखाते हैं और खतरों का दायरा बनाते हैं।

क्या-क्या दिखता है फर्स्ट हाफ में?

• इंडिया की इंटेलिजेंस सिस्टम की इनसाइड फंक्शनिंग
• पाकिस्तान की पावर स्ट्रक्चर—इंटेलिजेंस, गैंग, मिलिट्री
• कराची का ल्यारी गैंग—हत्यारे, ड्रग्स, एक्सटॉर्शन
• हमजा की घुसपैठ और उसका अंडरकवर संघर्ष
• गैंगस्टर की तरह जीने की मजबूरी
• हर पल पकड़े जाने का खतरा

यहां रणवीर सिंह का ‘ट्रांसफॉर्मेशन’ देखने लायक है—
हेयरस्टाइल, बॉडी लैंग्वेज, बोलने का अंदाज़, आंखों की बेचैनी—सब कुछ असली लगता है।

फर्स्ट हाफ खास इसलिए है क्योंकि यह थ्रिल और रियलिज़्म को एक साथ चलाता है।

रणवीर सिंह: करियर का अब तक का सबसे हार्ड-हिटिंग रोल

रणवीर सिंह अपने हाई-एनर्जी और एक्सप्रेसीव रोल्स के लिए जाने जाते हैं। लेकिन धुरंधर में उन्होंने बिल्कुल अलग रास्ता चुना है।
यह किरदार—
• शांत है
• धोखों से भरा है
• हर समय रिस्क में है
• अंदर से टूटता है
• बाहर से पत्थर बना रहता है

रणवीर की आंखों में डर, गुस्सा, दर्द और मिशन का जुनून—चारों एक साथ दिखते हैं।
उनका हमजा एक ‘पोस्टर स्पाई’ नहीं, एक असली खुफिया अधिकारी लगता है, जो हर पल अपनी जान हथेली पर रखता है।

रणवीर की चार बड़ी ख़ूबियां—

  1. कम शब्दों में गहरी एक्टिंग
  2. रफ-रियल बॉडी लैंग्वेज
  3. इमोशनल कंट्रोल
  4. डार्क साइड का प्रभावशाली प्रदर्शन

कई सीन आपको ‘उरी’ याद दिलाते हैं, लेकिन रणवीर यहां एक बिल्कुल नई पहचान बनाते हैं—
एक ऐसा स्पाई जो स्क्रीन चीरकर आपकी नसों में चलने लगता है।

अक्षय खन्ना: साइलेंट इंटेलिजेंस का एक्सपर्ट मास्टरमाइंड

अक्षय खन्ना का स्क्रीन प्रेज़ेंस फिल्म को एक दूसरी ही ऊंचाई देता है।
एक IB चीफ के रूप में उनका संयम, उनकी निगाहें, उनका रिएक्शन—सब कुछ ‘क्लासी’ है।

वे फिल्म में किसी एक्शन में नहीं दिखते, लेकिन उनका दिमाग पूरी कहानी को आगे बढ़ाता है।

उनके और रणवीर के बीच की ‘अनकही केमिस्ट्री’—शानदार है।
दोनों ऐसे लगते हैं जैसे दो तरफ बैठे खिलाड़ी हों, जो एक ही मिशन के लिए जान दांव पर लगा रहे हैं।

अर्जुन रामपाल: खतरनाक, शांत और डेडली विलेन

रामपाल ने एक अनोखा विलेन बनाया है—
• न चिल्लाता है
• न चीखता है
• न जरूरत से ज्यादा एक्टिंग करता है

उसकी शांति ही डर बनती है।
हर सीन में लगता है कि वह कुछ बड़ा करने वाला है।

उनका और रणवीर का आमना-सामना—फिल्म के टॉप 3 सीन में शामिल है।

दूसरा हाफ: हाई-ऑक्टेन थ्रिलर, पॉलिटिकल गेम और ऑपरेशन की आग

फिल्म का दूसरा हिस्सा स्पीड पकड़ता है और यह स्पीड अंत तक नहीं टूटती।

यह हिस्सा दिखाता है—
• RAW और ISI की जंग
• कराची में गुप्त ऑपरेशन
• अंडरकवर एजेंट की सच्ची तकलीफ
• राजनीतिक दबाव
• मीडिया और प्रोपेगैंडा
• भारत की रणनीति

कुछ जगह फिल्म बेहद रॉ हो जाती है, खासकर
कराची ऑपरेशन वाले सीन्स में

ये सीन्स भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन स्पाई सीक्वेंस में गिने जाएंगे।

संवाद—संवेदनशील, तीखे और देश की सुरक्षा पर आधारित

फिल्म में संवाद ‘लाउड’ नहीं हैं।
वे शांत हैं, लेकिन असर सीधे दिल में उतरता है।

कुछ बेहतरीन संवाद—
• “जंग हर बार सरहद पर नहीं लड़ी जाती।”
• “जो दिखता है, वही सच नहीं होता।”
• “एक एजेंट का नाम नहीं होता, सिर्फ काम होता है।” डायलॉग्स सिर्फ कहानी नहीं बढ़ाते—फिल्म को गहराई देते हैं।

टेक्निकल लेवल: फिल्म की असली जान

1. सिनेमेटोग्राफी

कराची की तंग गलियों, अंडरवर्ल्ड के अड्डों, भारतीय इंटेलिजेंस ऑफिस, गुप्त बंकर—सभी को बेहद रियल तरीके से शूट किया गया है।
कई लोकेशन इतने वास्तविक लगते हैं कि आप भूल जाते हैं कि यह फिल्म है।

2. बैकग्राउंड स्कोर

तेज, गहरा, और दिल की धड़कनों के साथ चलता हुआ।
स्कोर बिना हावी हुए फिल्म को ऊंचा उठाता है।

3. एक्शन

कोई मॉसाला नहीं।
कोई ओवर-द-टॉप स्टंट नहीं।
जितना जरूरी है—उतना ही दिखाया गया है।

4. एडिटिंग

टाइट, क्रिस्प और थ्रिलर के लिए बिल्कुल सही।

भावनात्मक पक्ष—फातिमा सना शेख का सीमित लेकिन प्रभावशाली रोल

फातिमा की मौजूदगी फिल्म को एक ‘इमोशनल सॉफ्ट स्पॉट’ देती है।
उनके और रणवीर के बीच रोमांस नहीं, बल्कि एक ‘मानवीय जुड़ाव’ है—जो जासूस की कहानी में भी उम्मीद की एक रोशनी छोड़ता है।

फिल्म का संदेश — अंडरकवर हीरो की दुनिया सबसे क्रूर है

फिल्म एक बड़ा सवाल पूछती है—
देश की सुरक्षा के लिए जो लोग अपना नाम, रूप, पहचान तक कुर्बान कर देते हैं… क्या हम उनकी ज़िंदगी को जानते भी हैं?”

यह फिल्म दिखाती है—
• जासूसों की जिंदगी फिल्मी नहीं होती
• वे हर दिन मरने जैसा दर्द झेलते हैं
• वे देश के लिए जीते हैं, लेकिन गुमनाम रहते हैं

यही ‘गुमनामी’ फिल्म की सबसे बड़ी भावना है।

कमजोरियां

• दूसरा हाफ 10-12 मिनट खिंचा हुआ लगता है
• कुछ साइड किरदारों को गहराई मिल सकती थी
• पाकिस्तान के राजनीतिक तंत्र को और विस्तार दिया जा सकता था

लेकिन ये कमजोरियां फिल्म के प्रभाव को कम नहीं करतीं।

निष्कर्ष — 2025 की सबसे दमदार, रियलिस्टिक और प्रभावशाली स्पाई फिल्म

धुरंधर एक ऐसी फिल्म है जो आपको थकाती नहीं, बल्कि आपकी नसों को झकझोर देती है।
यह सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं—एक गहरा, रिसर्च-ड्रिवन, इमोशनल और शक्तिशाली स्पाई ड्रामा है।

रणवीर सिंह ने अपने करियर का सबसे पावरफुल, सबसे शांत और सबसे खतरनाक रोल निभाया है।
अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल ने अपनी अदाकारी से फिल्म को ऊंचाई दी है।
आदित्य धर ने यह साबित कर दिया कि वह भारत के टॉप 3 निर्देशकों में से एक हैं, जब बात आती है इंटेलिजेंस-थ्रिलर की दुनिया बनाने की।

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